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NIT Rourkela: एनआईटी शोधकर्ताओं ने विकसित किया नया एआई मॉडल, वाहनों के बीच संवाद होगा और सुरक्षित

Mon, 29 Sep 2025 07:15 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NIT Rourkela: एनआईटी के शोधकर्ताओं ने वाहनों के बीच संचार को बेहतर बनाने के लिए नया AI मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल वाहन-टू-वाहन नेटवर्क (VANETs) में संदेशों की भीड़ और देरी को रोकता है, जिससे सड़क सुरक्षा और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी।
 
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NIT Rourkela, एनआईटी राउरकेला - फोटो : Official Website (nitrkl.ac.in. )
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विस्तार
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NIT Rourkela: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) के शोधकर्ताओं ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल विकसित किया है, जो भविष्य में वाहनों के बीच सीधा संवाद यानी व्हीक्युलर एड-हॉक नेटवर्क (VANETs) को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकेगा। इस मॉडल का नाम है – “एडैप्टिव कंटेंशन विंडो ऑप्टिमाइजेशन इन व्हीक्युलर नेटवर्क्स विद मल्टी-एजेंट डीप रिइनफोर्समेंट लर्निंग”। इसे पेटेंट भी मिल चुका है।

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क्यों है खास?

VANET तकनीक का सिद्धांत यह है कि सड़क पर एक-दूसरे के करीब चल रहे वाहन आपस में सीधा संवाद कर सकें। मसलन, अगर कोई कार अचानक ब्रेक लगाती है या सामने अवरोध आ जाता है तो वह आसपास चल रही गाड़ियों को तुरंत चेतावनी दे सके। इससे ड्राइविंग सुरक्षित होती है, ट्रैफिक सिस्टम बेहतर होता है और इमरजेंसी सेवाओं को मदद मिलती है।

लेकिन एक बड़ी चुनौती यह है कि जब कई वाहन एक साथ संदेश भेजते हैं तो नेटवर्क में भीड़ हो जाती है। इससे संदेश देर से पहुंचते हैं या कई बार खो भी जाते हैं, जो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डालता है।

समाधान क्या है

एनआईटी राउरकेला के असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण कुमार के अनुसार, "हमने इस समस्या का समाधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सुझाया है। इसमें मल्टी-एजेंट डीप रिइन्फोर्समेंट लर्निंग तकनीक का उपयोग किया गया है। सरल भाषा में कहें तो यह सिस्टम हर वाहन को सिखाता है कि वह अपना संदेश कब भेजे ताकि जरूरी अलर्ट को प्राथमिकता मिल सके और संदेशों में टकराव न हो।"

यह अनुकूलन (Adaptive Adjustment) देरी की संभावना को कम करता है और सुनिश्चित करता है कि अहम संदेश समय पर पहुंचे।

सड़क सुरक्षा से जुड़ाव

भारत में 2023 में लगभग 4.8 लाख सड़क हादसे हुए, जिनमें करीब 1.72 लाख मौतें दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी आधुनिक तकनीकों से इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। शोधकर्ता इसे सुरक्षित सड़कों और स्मार्ट सिटी की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं।

संभावित उपयोग

इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक लाइट्स: वाहन के ब्रेक लगाने की चेतावनी पीछे चल रही गाड़ियों को मिल सके।
  • प्लाटूनिंग (Platooning): वाहन एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर आगे बढ़ें।
  • नेविगेशन सिस्टम सुधार: रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट और बेहतर रूट की जानकारी।
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया: दुर्घटना या अन्य इमरजेंसी सूचना का त्वरित प्रसारण।
  • ई-पेमेंट व टोल सिस्टम: नजदीकी दुकानों, रेस्टोरेंट या टोल प्लाजा पर तुरंत भुगतान सुविधा।

एनआईटी राउरकेला के प्रोफेसर बिभुदत्त साहू ने कहा, "यह पेटेंट भारत की सड़कों को वाहन-टू-वाहन संचार के लिए तैयार करने की दिशा में व्यावहारिक कदम है। हम चाहते हैं कि अन्य संस्थानों के शोधकर्ता भी इसमें शामिल हों और हमारे रिसर्च लैब से जुड़कर भविष्य की स्वचालित गाड़ियों पर काम करें।"
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