रबर सेक्टर के लिए देश में बनी टिकाऊ तकनीक क्यों जरूरी?
CSIR-NIIST के डायरेक्टर डॉ. सी. आनंदरामकृष्णन ने बातचीत के दौरान कहा कि रबर सेक्टर केरल के औद्योगिक और आर्थिक इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा है, और इसके सामने आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए देश में बने, टिकाऊ और टेक्नोलॉजी के लिहाज से एडवांस्ड समाधानों की बहुत जरूरत है।
उन्होंने कहा, "CSIR-NIIST के पास मटीरियल, केमिकल, बायोलॉजिकल और प्रोसेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में मल्टी-डिसिप्लिनरी (कई विषयों की) विशेषज्ञता है, जबकि RRII के पास रबर सेक्टर की गहरी जानकारी और उससे करीबी जुड़ाव है। यह सहयोग वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक टेक्नोलॉजी में बदलने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा, जिससे रबर उद्योग, उद्यमियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स को फायदा होगा।"
स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स को भी मिलेगा फायदा
इस मौके पर रबर बोर्ड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वसंतगेसन (IRS) ने भी बात की। उन्होंने कहा कि NIIST और रबर बोर्ड के बीच का यह सहयोग इन दोनों संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा, "यह सहयोग सिर्फ सीएसआईआर-एनआईआईएसटी और रबर बोर्ड के बीच ही नहीं रहेगा। इससे पूरे रबर सेक्टर को फायदा होगा, जिसमें अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम स्तर के स्टेकहोल्डर्स, और खासकर रबर किसान शामिल हैं।"
प्रेस रिलीज के अनुसार, इस सहयोगी कार्यक्रम से रबर-आधारित उद्योगों, स्टार्ट-अप्स, उद्यमियों और रिसर्च स्कॉलर्स के कर्मचारियों में S&T (साइंस और टेक्नोलॉजी) स्किल्स के विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम सीएसआईआर-एनआईआईएसटी और आरआरआईआई की एक-दूसरे की पूरक और मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा और साथ ही भारतीय रबर सेक्टर की खास जरूरतों को पूरा करेगा, जिसमें केरल के संदर्भ में विशेष महत्व होगा।