ग्लेशियल लेक क्या होती है?
ग्लेशियल लेक यानी हिमनदीय झील। सरल शब्दों में समझें तो ग्लेशियल लेक यानी बर्फ के पिघलने से पहाड़ों पर बनने वाली झील। ग्लेशियर के पिघलने से जमा हुआ पानी जब पहाड़ों के बीच किसी जगह पर झील बना देता है, तो उसे ग्लेशियल लेक कहते हैं।
यह झील बनती कैसे है और पानी रुकता कैसे है?
ग्लेशियर यानी बर्फ की बहुत बड़ी और मोटी परत, जो पहाड़ों पर लंबे समय से जमा होती है। जब तापमान बढ़ता है तो ग्लेशियर का कुछ हिस्सा पिघलता है। यह पानी पहाड़ों की किसी गहरी जगह में जमा हो सकता है और धीरे-धीरे एक झील का रूप ले सकता है।
ऐसी झीलें ग्लेशियर के आगे, उसके किनारे या कभी-कभी उसके नीचे भी बन सकती हैं। इनके पानी को कई बार बर्फ, चट्टान और मिट्टी से बनी प्राकृतिक दीवार रोककर रखती है।
ग्लेशियल लेक खतरनाक क्यों हो सकती है?
हर ग्लेशियल झील खतरनाक नहीं होती। समस्या तब पैदा होती है जब झील में पानी लगातार बढ़ता जाए और उसे रोकने वाली प्राकृतिक दीवार कमजोर हो जाए।
ग्लेशियल झील की प्राकृतिक दीवार कई बार ग्लेशियर से निकली मिट्टी, पत्थरों और चट्टानों यानी मोरैन से बनी होती है। यह कोई मजबूत कंक्रीट की दीवार नहीं होती। इसलिए इसमें दरार पड़ने, इसका कुछ हिस्सा टूटने या पानी के ऊपर से बहने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
इसके अलावा आसपास की बर्फ या चट्टानों का बड़ा हिस्सा अचानक झील में गिर जाए तो भी पानी तेजी से बाहर निकल सकता है। भारी बारिश और बर्फ या चट्टानों के खिसकने जैसी घटनाएं भी इस खतरे को बढ़ा सकती हैं।
ग्लेशियल लेक फटने पर क्या होता है?
ग्लेशियल झील के अचानक टूटने या उसका पानी तेजी से बाहर निकलने की घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है।
इसे सामान्य बाढ़ से थोड़ा अलग समझना जरूरी है। सामान्य बाढ़ में पानी धीरे-धीरे बढ़ सकता है, लेकिन GLOF में झील का बहुत सारा पानी अचानक पहाड़ से नीचे की ओर तेजी से बहता है।
पहाड़ों की ढलान के कारण पानी बहुत तेज गति से नीचे आता है। रास्ते में यह अपने साथ मिट्टी, पत्थर, बर्फ और दूसरी चीजें भी बहा लाता है। इससे नदी का बहाव अचानक कई गुना बढ़ जाता है और नीचे बसे गांवों, सड़कों, पुलों तथा बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है।
क्या हर ग्लेशियल झील फट जाती है?
नहीं... यह जरूरी नहीं। केवल ग्लेशियल झील का मौजूद होना इस बात का संकेत नहीं है कि वह जल्द फट जाएगी। खतरा झील के आकार, उसमें पानी की मात्रा, उसे रोकने वाली प्राकृतिक दीवार की स्थिति और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों समेत कई चीजों पर निर्भर करता है। इसीलिए वैज्ञानिक उपग्रह तस्वीरों और जमीन पर किए जाने वाले सर्वे के जरिए ऐसी झीलों की निगरानी करते हैं।