युवा कलाकारों को शिक्षक बनने का मौका
स्कूली पाठयक्रम में आर्ट एजुकेशन को अनिवार्य विषय बनाया गया है। इसका अर्थ है कि आठवीं कक्षा के सभी छात्रों को इसकी पढ़ाई करनी जरूरी होगा। यदि किसी स्कूल में आर्ट एजुकेशन के शिक्षक नहीं होंगे तो वहां राष्ट्रीय स्तर के युवा कलाकारों को पढ़ाने का मौका मिलेगा। एनईपी 2020 में भी मापदंड पूरा करने वाले ऐसे युवा कलाकारों को पढ़ाने का मौका देने की प्रमुख सिफारिशों में एक हैं। इसके लिए डिग्री होनी जरूरी नहीं है, बल्कि अपने क्षेत्र में योग्यता और काबिलियत के आधार पर उनका चयन किया जाएगा।
कला की कक्षा में 40 मिनट के 150 पीरियड
कला विषय की कक्षा कुल 100 घंटे की होगी। इसमें 40 मिनट के कुल 150 पीरियड होंगे। एक हफ्ते में चार पीरियड और शनिवार को फील्ड में प्रैक्टिस करनी होगी। इन 100 घंटों को कला की चारों विधाओं थियेटर, म्यूजिक, डांस -मूवमेंट व विजुअल आर्ट में बराबर बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर- सोमवार को आर्ट एजुकेशन थियेटर, मंगलवार को म्यूजिक, बुधवार को डांस, बृहस्प्तिवार को विजुअल आर्ट और शनिवार को फील्ड में जाकर प्रैक्टिस होगी। इसका अर्थ है कि डांस, म्यूजिक या प्ले अकेडमी जाकर प्रैक्टिस करना आदि।
ग्रेड और स्केल के आधार पर मूल्यांकन
इसमें मूल्यांकन लिखित कागज, पैन-पेपर आधारित परीक्षा के बजाय प्रैक्टिकल आधार पर होगा। हर कक्षा और परफार्मेंस के आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन सालभर चलेगा। इसमें छात्र के एक्सप्रेंशन, विज़ुअलाइज़ेशन, इमेजीनेशन, क्रिएटिविटी की भी परख होगी। ग्रेड या स्कोर पांच भागों में होगा, जिसमें बिगनिंग यानी शुरुआत में ग्रेड ई व स्केल एक, डेवलपिंग में ग्रेड डी और स्केल दो, प्रोमिसिंग में ग्रेड सी व स्केल तीन, प्रोफिसेंट में ग्रेड बी व स्कूल चार और एक्सीलेंट में ग्रेड ए व स्केल पांच होगा।