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CBI चार्जशीट में खुलासा: NTA में नहीं होती थी एक्सपर्ट्स की तलाशी, सुरक्षा व्यवस्था में मिली बड़ी खामियां

Fri, 07 Aug 2026 06:18 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

NEET UG Paper Leak: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एनटीए की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चार्जशीट में विशेषज्ञों की फ्रिस्किंग न होने, सीसीटीवी निगरानी की कमी और पेपर तैयार करने की प्रक्रिया में बड़ी खामियों का जिक्र है।
 
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NEET UG Paper Leak - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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NEET UG Paper Leak: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आने का दावा किया है। 94 पेज की चार्जशीट में एजेंसी ने कहा है कि एनटीए के गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों की जांच और तलाशी की व्यवस्था नहीं थी। यहां तक कि इस सेक्शन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग लाइव-फीड सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था।

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सवालों को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया क्या थी?

सीबीआई के अनुसार नीट यूजी के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया मुख्य रूप से चार चरणों में होती है। इनमें सवाल तैयार करना, मॉडरेशन, वेटिंग और अनुवाद शामिल हैं।
  • पहले चरण में विशेषज्ञ सवाल और उनके जवाब तैयार करते हैं।
  • इसके बाद मॉडरेशन में विशेषज्ञ चार सेटों के लिए सवाल चुनते हैं। प्रत्येक सेट में 45 सवाल तय किए जाते हैं, यानी कुल 180 सवाल।
  • इसके बाद वेटिंग में विशेषज्ञ इन सवालों को हल करके जवाबों की जांच करते हैं।
  • किसी जवाब को लेकर विवाद होने पर एनटीए के निदेशक मॉडरेटर और वेटर के साथ मिलकर उसका समाधान करते हैं।
  • अंतिम चरण में प्रश्नपत्रों का अलग-अलग भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाता है।
  • इसके बाद विशेषज्ञ उनका अंग्रेजी में बैक ट्रांसलेशन करते हैं, ताकि अनुवाद में सवाल का अर्थ न बदले।

सीबीआई ने प्रक्रिया में क्या बड़ी खामी बताई?

सीबीआई के अनुसार अलग-अलग चरणों के लिए अलग विशेषज्ञ होने चाहिए, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न मिल सके। लेकिन नीट यूजी 2026 में कई विशेषज्ञ एक से ज्यादा चरणों में शामिल थे।

चार्जशीट के मुताबिक मॉडरेशन के बाद विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच मिल जाती थी। खास तौर पर अनुवाद और बैक ट्रांसलेशन के दौरान एक विशेषज्ञ चारों अंतिम मास्टर सेट देख सकता था।

गोपनीय सेक्शन में नहीं होती थी तलाशी?

सीबीआई के मुताबिक एनटीए का गोपनीय सेक्शन ओखला स्थित NSIC भवन की पहली मंजिल के एक पूरे हिस्से में था। यहीं नीट जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार किए जाते थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि:
  • विशेषज्ञों के गोपनीय सेक्शन में प्रवेश और बाहर निकलते समय उनकी जांच या तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
  • इसी खामी का फायदा केमिस्ट्री विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने उठाया। 
  • उसने कथित तौर पर 135 केमिस्ट्री सवाल छोटे-छोटे कागजों पर लिखे और तीन दिनों तक उन्हें बिना पकड़े होटल तक ले गया।

तीन एनटीए विशेषज्ञों पर क्या आरोप है?

सीबीआई ने एनटीए के पैनल में शामिल तीन विशेषज्ञों को पेपर लीक की मुख्य कड़ी बताया है। इनमें केमिस्ट्री के पीवी कुलकर्णी, बॉटनी और जूलॉजी की मनीषा गुरुनाथ मांढरे और फिजिक्स की मनीषा संजय हवलदार शामिल है।

चार्जशीट के अनुसार इन तीनों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर अंतिम प्रश्नपत्र को काफी हद तक दोबारा तैयार किया और कथित तौर पर इसे पैसे लेकर छात्रों के एक समूह तक पहुंचाया।

मनीषा मांढरे बॉटनी के अंग्रेजी से मराठी अनुवाद और जूलॉजी के बैक ट्रांसलेशन का काम कर रही थी। सीबीआई के अनुसार वह काम खत्म करने के बाद होटल लौटकर एनसीईआरटी की किताबों में संबंधित हिस्सों को चिन्हित करती थी।

मांढरे ने 9 मार्च से 5 अप्रैल के बीच एनटीए के नीट यूजी 2026 के बॉटनी और जूलॉजी से जुड़े अनुवाद और बैक ट्रांसलेशन के काम में हिस्सा लिया था।

वहीं, फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा हवलदार पर आरोप है कि वह दिन का काम पूरा करने के बाद दिल्ली में अपने ठहरने की जगह पर सवालों को संक्षिप्त रूप में लिखती थी।

पेपर छात्रों तक कैसे पहुंचा?

सीबीआई के अनुसार ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे ने कुलकर्णी और मांढरे की विशेष कक्षाओं में कुछ छात्रों को भेजा था। इन छात्रों की नोटबुक के आधार पर उसने सवालों का एक पेपर तैयार किया और उसे बिचौलियों के जरिए बेच दिया।

जांच एजेंसी के अनुसार ऐसा ही एक पेपर एक अभ्यर्थी तक पहुंचा, जिसने इसकी जानकारी एनटीए को दी। इसके बाद पेपर लीक मामले की जांच आगे बढ़ी।
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सीसीटीवी व्यवस्था में क्या कमी थी?

  • सीबीआई ने एनटीए के गोपनीय सेक्शन में अलग लाइव-फीड मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं होने को भी बड़ी खामी बताया है।
  • एनटीए केवल 20 से 25 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखता था।
  • नीट यूजी 2026 से जुड़ा गोपनीय काम 7 अप्रैल को पूरा हुआ था, जबकि मामला 12 मई को दर्ज हुआ।
  • जांच के दौरान संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं थी।
  • लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों की गतिविधियां नजर से बाहर रहीं।

3 मई को हुए नीट यूजी पेपर लीक ने करीब 23 लाख अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसे को प्रभावित किया था। मामले के बाद राजनीतिक विवाद भी हुआ और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
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