उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालतें विषय-वस्तु की विशेषज्ञ नहीं हैं और उन्हें केवल विषय पर कानून तथा विशेष मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में उसके अनुप्रयोग के आधार पर ही निर्णय देना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भौतिकी खंड में एक प्रश्न 'रेडियोधर्मिता' पर आधारित था, जबकि 'रेडियोधर्मिता विषय' इस वर्ष के NEET-UG के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं था।
अदालत ने कहा कि यह विशेष प्रश्न परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा गठित विषय विशेषज्ञों के समक्ष रखा गया था और उन्होंने अपनी राय दी है कि पाठ्यक्रम में 'परमाणु और नाभिक' अध्याय के अंतर्गत इकाई संख्या 18 में 'नाभिक की संरचना और आकार' तथा 'परमाणु द्रव्यमान' शामिल हैं।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा, "विषय विशेषज्ञों ने याचिकाकर्ता की चुनौती को नकार दिया है। इसलिए, इस अदालत की राय है कि वह अपनी समझ को विशेषज्ञों की समझ के स्थान पर नहीं रख सकती, जो विषय की जटिलताओं और बारीकियों को समझने में बेहतर ढंग से सक्षम हैं।"
अदालत ने कहा, "इस अदालत की राय है कि जब एनटीए के अकादमिक और विषय विशेषज्ञों ने राय दी है कि विवादित प्रश्न एनईईटी (यूजी)-2024 के निर्धारित पाठ्यक्रम से तैयार किया गया है, तो यह अदालत विशेषज्ञों की बुद्धिमता पर संदेह नहीं कर सकती और इसके स्थान पर अपनी राय नहीं रख सकती।"
इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने दो अन्य अभ्यर्थियों की दो अलग-अलग याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि कुछ प्रश्नों के उत्तर गलत दर्ज किये गये थे। न्यायालय ने कहा कि जहां त्रुटि स्वयं स्पष्ट नहीं है, वहां वह विवादित प्रश्नों के सही उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन, पुनर्विश्लेषण नहीं कर सकता।