हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह की एकल पीठ ने कहा कि इन अभ्यर्थियों को उन लोगों के रूप में नहीं माना जा सकता, जिनके खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी साबित हो चुकी है। अदालत ने कहा कि सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र की अभी कानून के अनुसार जांच होनी बाकी है।
हाईकोर्ट ने कहा, "इस चरण में याचिकाकर्ताओं को ऐसे व्यक्ति के तौर पर नहीं माना जा सकता जिन पर आपराधिक दोष साबित हुआ हो या जिन्हें किसी गैर-कानूनी काम का दोषी पाया गया हो।"
न्यायमूर्ति सिंह आदित्य विनोद स्वामी और एक अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में नीट यूजी 2026 (री-नीट) के परिणाम जारी करने और चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मांगी गई थी।
एनटीए ने रिजल्ट क्यों रोका?
- सुनवाई के दौरान एनटीए की ओर से पेश वकील ने कहा कि परीक्षा एजेंसी ने सीबीआई से मिली जानकारी के बाद परिणाम रोके थे।
- सीबीआई ने एनटीए को बताया था कि कई अभ्यर्थियों ने 3 मई की परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर प्राप्त किया या साझा किया था।
हालांकि, सीबीआई की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने प्रश्नपत्र प्राप्त किया था और कथित गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम देने के लिए उनके पास "mens rea" (आपराधिक इरादा) था।
यह भी कहा गया कि प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए दोनों ने पैसे का भुगतान किया था। सीबीआई ने आगे कहा कि उसने संबंधित छात्रों के खिलाफ नरम रुख अपनाते हुए उन्हें आरोपी नहीं बनाया और आरोपपत्र में गवाह के तौर पर पेश किया।
आरोपों पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र में लगाए गए आरोप अभी साक्ष्यों के जरिए साबित होने बाकी हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "सीबीआई की फाइल की गई चार्जशीट का कानून के हिसाब से टेस्ट होना अभी बाकी है और उसमें लगे आरोपों को सही सबूतों से साबित करना होगा।"
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने "एकेडमिक करियर की शुरुआती अवस्था" में हैं। अदालत ने माना कि अभी तक जांचे नहीं गए आरोपों के आधार पर उनका परिणाम रोकने से उन्हें गंभीर नुकसान होगा।
अदालत ने कहा, "पिटीशनर्स को अपना रिजल्ट जानने की इजाजत मिलनी चाहिए और कार्रवाई के नतीजे के आधार पर एनटीए द्वारा आयोजित काउंसलिंग के अगले राउंड में हिस्सा लेने की इजाजत मिलनी चाहिए।"
काउंसलिंग को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर दोनों अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में शामिल होने का अवसर नहीं देने से ऐसे परिणाम हो सकते हैं, जिनकी बाद में पर्याप्त रूप से भरपाई नहीं की जा सकेगी। इसी आधार पर अदालत ने एनटीए को निर्देश दिया कि आदेश अपलोड होने के 24 घंटे के भीतर याचिकाकर्ताओं के परिणाम घोषित किए जाएं।
इसके साथ ही उन्हें आगे की काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जाए। यह अनुमति इस शर्त के साथ होगी कि वे अन्य सभी लागू पात्रता मानदंड पूरे करते हों। जिन याचिकाकर्ताओं के काउंसलिंग परिणाम अभी घोषित नहीं हुए हैं, उन्हें ऑफलाइन आवेदन करने की भी अनुमति दी गई है।
क्या सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगी है?
नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसका आदेश अधिकारियों को कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं रोकता। यदि आगे की प्रक्रिया में कार्रवाई जरूरी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। अंतरिम अर्जी का निपटारा करते हुए न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह ने मुख्य याचिका को 8 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।