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NEET PG Counselling: आखिर क्यों हड़ताल कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर, नीट काउंसलिंग में देरी से क्या फर्क पड़ेगा, कैसे बर्बाद हुआ एक साल?

Tue, 07 Dec 2021 05:25 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Delay In Neet Counselling 2021: प्रथम वर्ष के छात्रों के न आने की वजह से रेजिडेंट डॉक्टरों को 36-36 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है। वहीं काउंसलिंग में देरी की वजह नीट पीजी करने वाले छात्रों का साल बर्बाद हो रहा है। जानिए यह देरी किस तरह स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रही है।
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नीट पीजी काउंसलिंग में देरी को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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Delay In Neet Counselling 2021: केंद्र द्वारा संचालित आरएमएल, सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने नीट-पीजी 2021 काउंसलिंग में देरी के खिलाफ फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी विरोध के समर्थन में सोमवार से सभी नियमित और आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार कर दिया है। वहीं फोर्डा के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन जारी है। इसके तहत, कई राज्यों में रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी कार्य सेवाओं का बहिष्कार कर रखा है। स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों और तीमारदारों पर इसका काफी असर पड़ रहा है।

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लाखों अभ्यर्थियों को है नीट पीजी काउंसलिंग का इंतजार

<p>वहीं राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा, स्नातकोत्तर (नीट पीजी) 2021 की परीक्षा&nbsp; को पास करने वाले लाखों उम्मीदवारों को उनकी काउंसलिंग का इंतजार है। काउंसलिंग में देरी की वजह से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश में भी देरी हो रही है। ऐसे में अमर उजाला की एजुकेशन टीम ने&nbsp;विशेषज्ञों से बातचीत करके यह समझने की कोशिश की कि यह देरी शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ स्वास्थ्य प्रणाली को किस तरह प्रभावित कर सकती है। पढ़िए….</p> <p>&nbsp;</p>

शिक्षा प्रणाली पर पड़ रहा है प्रभाव

<p><meta>नीट एक्सपर्ट डाॅ.&nbsp;अंशुमन अग्रवाल बताते हैं कि कोरोना और आरक्षण के मामले की वजह से नीट पीजी देने वाले लाखों अभ्यर्थियों का एक साल बर्बाद हो गया है। पहले नीट पीजी की परीक्षा अप्रैल 2021 में आयोजित होने वाली थी किंतु कोरोना की दूसरी लहर और बढ़ते मामलों की वजह से इस स्थगित कर दिया गया। बाद में यह परीक्षा 11 सितंबर यानी 5 महीने बाद&nbsp;आयोजित की गई। परिणाम घोषित होने के बाद कोर्ट में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग को आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर कर काउंसलिंग प्रक्रिया को बाधित किया गया। अब इस मुद्दे पर अगली सुनवाई जनवरी में होगी। यानी नीट पीजी 2021 पास करने वाले अभ्यर्थियों का एक साल बर्बाद हो गया।</p>

इस वजह से परेशान हैं छात्र

<p>साल बर्बाद होने की वजह से छात्र परेशान हैं। क्योंकि मेडिकल एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें सफलता पाने के लिए बहुत सालों तक पढ़ाई करनी पड़ती है। ऐसे में एक साल का बर्बाद होना&nbsp;छात्रों को परेशान कर रहा है। डाॅ.&nbsp;अंशुमन अग्रवाल आगे कहते हैं कि काउंसलिंग में देरी की वजह से नीट पीजी 2021 और नीट पीजी 2022 के बैच के बीच केवल 3 से 4 महीनों का ही अंतर होगा। जिसकी वजह से नीट एसएस में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या और प्रतियोगिता के स्तर में इजाफा होने की&nbsp;संभावना है।&nbsp;</p>

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लगातार 36 घंटे काम करने के लिए मजबूर रेजिडेंट डॉक्टर्स

<div>फोर्डा के&nbsp;अध्यक्ष डॉ. मनीष बताते हैं कि&nbsp;अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। इस वर्ष प्रवेश में देरी होने के कारण पीजी प्रथम वर्ष के छात्र अभी तक नहीं आए हैं, जबकि तृतीय वर्ष के छात्र पहले ही पास आउट हो चुके हैं। इसकी वजह से दूसरे वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में मरीज-डॉक्टर अनुपात के खराब होने के कारण हालत वैसे भी गंभीर है। ऐसे में&nbsp;प्रथम वर्ष के डॉक्टरों की अतिरिक्त कमी की वजह से दूसरे वर्ष के डॉक्टरों को हफ्ते में 100-100 घंटे काम करना पड़ रहा है। इस बीच भारत में ओमिक्रॉन की दस्तक रेजिडेंट डॉक्टर्स पर और बुरा असर डाल सकती है।</div>

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