अमेजन पर पुराने प्रश्नपत्रों की बिक्री का मुद्दा क्यों उठा?
सुनवाई के दौरान मामले में पेश हुए एक अन्य वकील ने एनबीईएमएस की दलील पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि पिछले वर्षों के नीट-पीजी प्रश्नपत्र अमेजन पर आसानी से बेचे जा रहे थे। वकील ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब पुराने प्रश्नपत्र बाजार में उपलब्ध हैं, तो फिर परीक्षा बोर्ड को वास्तविक प्रश्न सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है?
पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
एनबीईएमएस की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पारदर्शिता का क्या होगा? आप जो कर रहे हैं, उसके बारे में आपको और विस्तार से समझाना होगा।"
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने आगे कहा कि अदालत बोर्ड की मौजूदा नीति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उसे यह स्पष्ट करना होगा कि उसकी परीक्षा व्यवस्था दूसरी परीक्षाओं से अलग क्यों है। उन्होंने कहा, "हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। आपको हमें ठीक-ठीक समझाना होगा कि आप दूसरी परीक्षाओं से अलग रुख क्यों अपना रहे हैं।"
अदालत की इस टिप्पणी से साफ है कि वह केवल प्रश्न बैंक सीमित होने की दलील को पर्याप्त नहीं मान रही है। बोर्ड को अपने फैसले के पीछे ठोस कारण बताने होंगे।
एनबीईएमएस को क्या निर्देश दिया गया?
सुप्रीम कोर्ट ने एनबीईएमएस को लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बोर्ड को अपने जवाब में मुख्य रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों का खुलासा करने से परीक्षा की विश्वसनीयता कैसे प्रभावित हो सकती है। इस मामले में अब आगे की सुनवाई के दौरान बोर्ड की दलीलों पर विचार किया जाएगा।