दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी केंद्र सरकार से चिकित्सा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा रद्द करने की अपील की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक पहले ही इन प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कर चुके हैं।
ममता बनर्जी का कहना है कि नीट और जेईई परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या लाखों हैं और ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा- मैंने परीक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई पत्र लिखे हैं और कहा है कि जब छात्र परेशान हैं, तो ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रिव्यू की मांग कर सकती है।
वहीं, दिल्ली अभिभावक संघ ने भी नीट और जेईई परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की है। मशहूर पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग मंगलवार को ही नीट और जेईई परीक्षा को स्थगित करने की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में उतर गई थीं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान नीट-जेईई परीक्षा के आयोजन को अनुचित बताया था। दूसरी तरफ, चार हजार से ज्यादा विद्यार्थी पहले ही नीट परीक्षा के स्थगित करने की मांग को लेकर एक दिन की भूख हड़ताल कर चुके हैं।
क्या कहना है छात्रों और शिक्षाविदों का?
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति गिरीश्वर मिश्र का कहना है कि सरकार को नीट व जेईई परीक्षा के आयोजन में जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। इन परीक्षाओं के लिए छात्रों को बेहतर तैयारी की जरूरत होती है, जो कि कोरोना संकट की वजह से बाधित हुई है, ऐसे में इन परीक्षाओं को स्थगित कर देना चाहिए।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर राघवेंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि कोरोना संकट के इस दौर में नीट व जेईई परीक्षाओं का आयोजन जोखिम का काम है। लेकिन सरकार की चिंताओं को भी खारिज नहीं किया जा सकता। एक बार इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं का सिलसिला बिगड़ा, तो दूसरा संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में मेरा मानना है कि सरकार को केंद्रों कि संख्या बढ़ाकर और सुरक्षा के कड़े इंतजाम करके ही यह परीक्षा करानी चाहिए।
वहीं, बस्ती जिले के जगदीशपुर गांव निवासी सीमा पांडे का कहना है कि नीट व जेईई परीक्षाओं को स्थगित कर देना चाहिए। क्योंकि कई छात्र ऐसे इलाकों से आते हैं, जहां ट्रांसपोर्ट की दिक्कत है और उनके परीक्षा केंद्र काफी दूर हैं। इसके अलावा, कई जिलों में कोरोना का संक्रमण काफी है जिसकी वजह से छात्रों के साथ ही अभिभावक भी डरे हुए हैं। नीट परीक्षा की तैयारी कर नीलय उपाध्याय का कहना है कि जिस प्रकार से कोरोना की स्थिति चल रही है, ऐसे में परीक्षा को अगर सरकार टाल देती, तो छात्रों के लिए सही रहता।