'सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम होंगे तो भीतर का डर थोड़ा कम होगा'
उत्तराखंड की प्रतिष्ठा ने कहा कि परीक्षा देने में कोई दिक्कत नहीं है। परीक्षा केंद्र भी पास है। अगर परीक्षा देते वक्त सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता रखेंगे तो भीतर का डर थोड़ा कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर ये परीक्षाएं स्थगित भी होती हैं, तो आगे भी दिक्कतें तो जारी ही रहेंगी, क्योंकि कोरोना कब खत्म हो कोई नहीं जानता। इसलिए, परीक्षाओं का टालना कोई विकल्प नहीं है।
'पिछड़े क्षेत्रों के छात्र वंचित न हो.. सरकार को इस बात का ख्याल रखना चाहिए'
माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर सूर्यप्रकाश ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों के छात्र परीक्षा में कैसे भाग लेंगे सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। संभव है कि पिछड़े क्षेत्रों के छात्र इस परीक्षा देने से वंचित हो जाएं, ऐसे में उनका सालभर का सपना टूट जाएंगे। परीक्षा कराने के साथ ही तैयारी कैसी है इस पर गौर करना चाहिए।
'परीक्षा टलती है तो करियर का तनाव, होती है तो कोरोना संक्रमित होने का डर'
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर राघवेंद्र मिश्रा ने कहा कि इन परीक्षाओं को रद्द कराना विकल्प नहीं होगा। छात्र परीक्षा केंद्रों में किस तरह से पहुंचेंगे असल मुद्दा यह है। उन्होंने कहा कि 2020 में जिंदा रहने की प्राथमिकता है... परीक्षा टालना विकल्प इसलिए भी नहीं है कि छात्रों का जो एक साल बर्बाद होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी। परीक्षा टलती है तो छात्रों को तनाव होगा और नहीं टलती है तो कोरोना ग्रसित होना का भय सताएगा।
'परीक्षाओं को स्थगित कर देना चाहिए'
देहरादून की शिफा ने कहा कि परीक्षाओं को स्थगित कर देना चाहिए। सरकार को इस बात का ध्यान देना चाहिए कि दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले छात्र कैसे परीक्षा केंद्र पहुंचेंगे? वहीं, छात्र नीलय उपाध्याय ने कहा कि बाढ़ ग्रसित इलाकों को देखते हुए सरकार को परीक्षाओं को थोड़ा आगे बढ़ा देना चाहिए।
'असल चुनौती छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की है'
दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में तदर्थ प्राध्यापक प्रकाश उप्रेती ने कहा कि छात्र इन परीक्षाओं को नहीं देने की बात नहीं कर रहे हैं। इन परीक्षाओं के लिए विद्यार्थी दो-दो साल से तैयारी कर रहे हैं। बाढ़ और यातायात की समस्याओं को देखते हुए असल चुनौती छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।