अमर उजाला की खबर के बाद एनसीईआरटी ने शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए एक वर्षीय मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स शुरू करने की घोषणा की है। यह पाठ्यक्रम 2027 से दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु और शिलांग में शुरू होगा। प्रत्येक केंद्र पर 50 सीटें होंगी। इसमें छात्रों की शैक्षणिक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक समस्याओं को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने स्कूली शिक्षकों और काउंसलिंग के क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए मार्गदर्शन एवं परामर्स डिप्लोमा कोर्स यानी डिप्लोमा कोर्स इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग (डीसीजीसी) शुरू करने का एलान किया है। इसका मकसद, शिक्षकों व शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य पेशेवरों को छात्रों की शैक्षणिक, सामाजिक-भावनात्मक व नैतिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए प्रशिक्षित करना है।
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अमर उजाला में 10 अक्तूबर को हर समय थकावट, न भूख लग रही, न नींद आ रही... छठीं से 12वीं कक्षा तक के 85 फीसदी छात्र झेल रहे तनाव शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद एनसीईआरटी ने सोमवार को यह कोर्स शुरू करने की घोषणा की। फिलहाल, अगले साल से यह कोर्स एनसीईआरटी के छह केंद्रों-दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु व शिलांग केंद्र में चलाया जाएगा। प्रति केंद्र 50 सीट रहेंगी। एनसीईआरटी के विश्वविद्यालय बनने के बाद यह केंद्र कॉलेज बन जाएंगे। अगले चरण में सीटों में भी बढ़ोतरी होगी।
पाठ्यक्रम में तीन बिंदुओं पर फोकस
शैक्षणिक समस्याएं : पढ़ाई में कठिनाई, सीखने से जुड़ी चुनौतियां और शैक्षणिक प्रगति के लिए मार्गदर्शन पर रहेगा।
सामाजिक व भावनात्मक समस्याएं : छात्रों की भावनाओं, व्यवहार और सामाजिक संबंधों से जुड़ी चुनौतियों को समझना।
नैतिक समस्याएं : छात्रों में सही निर्णय लेने, जिम्मेदारी समझने और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने में सहायता करना।
एक वर्षीय कोर्स तीन भागों में बंटा
अगले साल से शुरू होने वाले इस डिप्लोमा कोर्स को तीन भागों में बांटा गया है। जनवरी-जून 2027 तक छह महीने का डिस्टेंस, जुलाई-सितंबर तक तीन महीने को फेस टू फेस और अक्तूबर से दिसंबर तक तीन महीने अपने गृह शहर में इंटर्नशिप का मौका मिलेगा। अधिकारी के मुताबिक, आज स्कूलों में छात्रों की समस्याएं केवल पढ़ाई या परीक्षा के दबाव तक सीमित नहीं हैं। कई बार छात्र करियर को लेकर असमंजस, साथियों से तुलना, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक चुनौतियों का भी सामना करते हैं। कुछ मामलों में छात्रों को ध्यानपूर्वक सुनने, उसकी परेशानी समझने और उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत होती है। यह कोर्स शिक्षकों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने में सहायता करेगा।