इसके कारण बदलाव जरूरी:
एनसीईआरटी ने छात्रों की योग्यता-आधारित दक्षताओं का आकलन किया था। कक्षा 3, 6, और 9 के छात्रों का भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन किया गया। इसमें सामने आया कि कक्षा 3 के 45 फीसदी छात्र 99 तक की संख्याएं ठीक से नहीं लिख पाए, और कक्षा 6 के 47 फीसदी बच्चे 10 का पहाड़ा नहीं सुना सके तो 54 फीसदी छात्र गणित की बुनियादी अवधारणाओं (जैसे स्थान मान, जोड़-घटाव) को समझने में संघर्ष कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव, और पुरानी शिक्षण विधियां हैं।
यह रीजनल सेंटर बनेंगे कॉलेज: एनसीईआरटी के साथ छह रीजनल सेंटर कॉलेजों में तब्दील होंगे जिसमें अजमेर (राजस्थान), भोपाल (मध्य प्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा), मैसूर (कर्नाटक), शिलांग (मेघालय) और भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं।
फिलहाल इन सेंटरों में स्थानीय यानी प्रदेश सरकार के विश्वविद्यालयों से प्राप्त डिग्री और पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई करवाई जाती है। लेकिन वर्ष 2027 से एनसीईआरटी की अपनी डिग्री की पढ़ाई शुरू होगी। उससे पहले, जो बैच पंजीकृत हैं, उनमें संबंधित विश्वविद्यालयों से डिग्री अवार्ड होगी।