स्कूली बच्चों में लैंगिक भेदभाव को दूर करने में कहानियां, नाटक और किताबें अहम भूमिका निभा सकते हैं। एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘स्कूलों को ऐसी किताबों, नाटकों और अन्य गतिविधियों का चयन करना चाहिए, जो लैंगिक पक्षपात से मुक्त हों। शिक्षकों को ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जो किसी एक लिंग या अन्य तक सीमित हो। उन्हें तटस्थ भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा न मिले।’
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महिला-पुरुष दोनों को नायक के तौर पर करें पेश
अधिकारी के अनुसार, शिक्षकों को ऐसी कहानियों, गीतों, गतिविधियों का उपयोग करना चाहिए, जो लड़कियों व लड़कों के साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सभी पेशों में समान रूप से चित्रित करते हों। महिलाओं व पुरुषों दोनों को नेता, नायक और समस्या का समाधान करने वाले के तौर पर पेश किया जाना चाहिए।