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NCERT: एनसीआरटी की किताब में चुनावी प्रक्रिया की तारीफ, निष्पक्ष चुनाव को बताया 'बेमिसाल'

Thu, 25 Jun 2026 12:55 PM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NCERT: एनसीआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे "बेमिसाल" बताया गया है। किताब में कहा गया है कि फेक न्यूज और गलत जानकारी जैसी चुनौतियों के बावजूद देश में निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराना भारतीय चुनाव आयोग की बड़ी उपलब्धि है।
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NCERT - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
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विस्तार
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Fair Elections: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस की किताब में भारत की चुनाव प्रक्रिया की तारीफ की है। किताब में चुनाव प्रक्रिया को "बेमिसाल" बताया गया है। इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग फेक न्यूज, गलत जानकारी और लोगों को डराने-धमकाने जैसी चुनौतियों के बावजूद निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश करता है।

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यह बात NCERT की नई किताब 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड - पार्ट 1' के 'चुनाव' अध्याय में कही गई है। यह किताब जल्द ही छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी।

(Elections) चैप्टर में भारत के चुनाव प्रोसेस के बड़े पैमाने और पूरे देश में चुनाव कराने में चुनाव आयोग की भूमिका पर जोर दिया गया है।

निष्पक्ष चुनाव की चुनौतियों और जिम्मेदारियों का किया जिक्र

किताब में लिखा है, "भारत का चुनाव प्रोसेस बेमिसाल है और दुनिया के दूसरे हिस्सों से अलग है, क्योंकि यहां अलग-अलग इलाकों और भौगोलिक स्थितियों में 96.8 करोड़ से ज्यादा योग्य वोटर हैं। चुनाव आयोग (ECI) इस प्रोसेस को आजादी से संभालता है और पूरे देश में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है।"

इसमें आगे कहा गया है, "निष्पक्ष चुनाव कराने में कई चुनौतियों के बावजूद, चुनाव आयोग यह पक्का करने की कोशिश करता है कि अलग-अलग स्तरों पर चुनाव निष्पक्ष हों।"

किताब में यह भी बताया गया है कि चुनाव आयोग वोटिंग के अलावा और भी कई जिम्मेदारियां निभाता है।

"अपने काम करने के लिए, जैसे कि वोटर लिस्ट अपडेट करना, उम्मीदवारों का नॉमिनेशन, कैंपेन को रेगुलेट करना, राज्यों के बीच कानून लागू करने में तालमेल, सुरक्षा के बड़े इंतजाम, वोटों की गिनती, चुनाव नतीजों का ऐलान और विवादों को सुलझाना, ECI इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी और ई-गवर्नेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है।"

चुनाव आयोग के कामकाज की तारीफ करते हुए, यह चैप्टर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराने में आने वाली चुनौतियों पर भी जोर देता है।

फेक न्यूज और गलत जानकारी से निपटने के लिए ECI कई उपाय अपनाता है

"निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए चुनौतियां" नाम के एक खास सेक्शन में कहा गया है, "भारत में, 96.8 करोड़ से ज़्यादा वोटरों (2024 में) के लिए चुनाव कराना, जिसमें हजारों पोलिंग स्टेशन और सैकड़ों पॉलिटिकल पार्टियां शामिल हों और जो अलग-अलग इलाकों और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में फैले हों, एक चुनौतीपूर्ण काम है।"

"गलत जानकारी, फेक न्यूज, डराने-धमकाने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ECI, RPA 1950 और 1951, आदर्श आचार संहिता, EVM, वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT), वोटर जागरूकता अभियान और दूसरे उपायों का इस्तेमाल करता है।"

यह किताब खास तौर पर गलत जानकारी, फेक न्यूज और डराने-धमकाने को चुनाव के दौरान आने वाली बड़ी चुनौतियों के तौर पर बताती है। आखिर में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोगों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

"लगातार सतर्कता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से, चुनाव ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले बन सकते हैं और लोकतंत्र और मजबूत हो सकता है।"

यह पाठ्यपुस्तक "कोई भी वोटर पीछे न छूटे" (No Voter to Be Left Behind) थीम के तहत चुनावों को ज़्यादा समावेशी बनाने के लिए चुनाव आयोग की कोशिशों पर भी जोर देती है।
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चुनाव प्रक्रिया को आसान और समावेशी बनाने पर जोर

  • किताब में ब्रेल-सक्षम EVM और वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर से वोटिंग की सुविधा का जिक्र किया गया है।
  • चुनाव आयोग के कई डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे सक्षम ऐप, वोटर हेल्पलाइन ऐप, cVIGIL, ETPBS, सुविधा, ERONET और सुगम का उल्लेख है।
  • छात्रों से दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों, सर्विस वोटर्स, कैदियों और एहतियाती हिरासत में रखे गए लोगों के लिए किए गए सुधारों की पहचान करने को कहा गया है।
  • अध्याय में राजनीतिक दलों को लोकतंत्र की "बुनियादी भूमिका" निभाने वाला बताया गया है।
  • छात्रों को 1977 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों में विजयी गठबंधनों का अध्ययन करने का भी सुझाव दिया गया है।
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