राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने वाली समिति के पूर्व सदस्य और विख्यात शिक्षाविद प्रो. जेएस राजपूत का कहना है कि नई नीति से छात्रों और अभिभावकों का तनाव दूर होगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को होगा, क्योंकि नई नीति में परीक्षा दो बार करने का विकल्प होगा। आने वाले समय में बोर्ड परीक्षा ऑन डिमांड होगी।
अब तक नर्सरी कक्षा की पढ़ाई प्री स्कूल में होती थी, लेकिन अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होगी। इसलिए इसका पूरा खाका दोबारा तैयार होगा। आंगनबाड़ी केंद्र स्कूलों से जुड़ेंगे। इसमें सुविधाओं से लेकर शिक्षकों की भी ट्रेनिंग पर काम होगा।
प्रो राजपूत कहते हैं कि शिक्षक ही बच्चे का निर्माता होता है। ऐसे में शिक्षकों को संतुष्ट और सही प्रशिक्षण जरूरी है। इसलिए शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है। प्रशिक्षण के लिए चार वर्षीय पाठ्यक्रम बनेगा। उनकी सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, ताकि वे संतुष्ट होकर शिक्षण का काम करें।