खास बात ये है कि मौलाना अबुल कलाम आजाद AICTE और UGC जैसे उचे निकायों की स्थापना के लिए जिम्मेदार थे। इसे अलावा आईआईटी, आईआईएससी और स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की भी उनके द्वारा स्थापना की गई थी।
मौलाना आजाद के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि भले ही उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं हुई, लेकिन वे उर्दू, फारसी, अरबी और हिंदी के अच्छे जानकार थे। वह गणित, विश्व इतिहास और विज्ञान के भी विद्वान थे।
मौलाना आजाद भी अपने समय के एक प्रमुख पत्रकार थे और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन का कारण बने। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र के विकास के बीच संबंध को समझा।
बता दें कि अबुल कलाम ने 1947 से 1958 तक स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका मानना था कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने न केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि उन्होंने 14 साल की आयु तक सभी बच्चों के लिए निशुल्क सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की वकालत की।
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