जांच में मिलीं कई गंभीर कमियां
यूनिवर्सिटी की जांच में पता चला कि कई कॉलेजों में बीएससी पाठ्यक्रम के लिए जरूरी लैब सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके अलावा कुछ कॉलेजों में योग्य शिक्षकों और प्रिंसिपल की नियुक्ति भी नहीं की गई थी। कई संस्थान ऑनलाइन शैक्षणिक और प्रशासनिक ऑडिट के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रस्ताव समय पर जमा करने में भी असफल रहे।
इन्हीं कमियों को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने नांदेड़, हिंगोली, लातूर और परभणी जिलों के 24 कॉलेजों में बीएससी प्रथम वर्ष के दाखिलों पर रोक लगा दी है। विश्वविद्यालय का कहना है कि जब तक ये कॉलेज आवश्यक मानकों और सुविधाओं को पूरा नहीं करते, तब तक वहां नए छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
कमियां दूर होने तक दाखिले रहेंगे बंद
अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई में उन कॉलेजों को भी शामिल किया गया है जो निरीक्षण प्रक्रिया में असफल रहे या मूल्यांकन के दौरान उन्हें 'F' ग्रेड मिला। इन कॉलेजों में जरूरी सुविधाओं और मानकों की कमी पाई गई, इसलिए यूनिवर्सिटी ने वहां बीएससी प्रथम वर्ष के दाखिलों पर रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक संबंधित कॉलेज अपनी कमियों को दूर नहीं कर लेते।
यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता, लैब सुविधाओं और आधिकारिक स्थिति की जांच जरूर कर लें। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए लिया गया है।