गीता ज्ञान सर्वोच्च संतुष्टि और खुशी प्रदान करता है
उन्होंने प्रस्ताव मसौदे में कहा कि भगवद्गीता भारतीय दर्शन पर आधारित एक प्राचीन ग्रंथ है और वेदों की अंतिम रचना में इस ग्रंथ को 'गीतोपनिषद' के रूप में भी बताया गया है। इसमें भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को जीवन के बारे में दी गई शिक्षाएं शामिल हैं। कोली ने कहा कि इसमें कहा गया है कि भगवद्गीता का ज्ञान मनुष्य को सर्वोच्च संतुष्टि और खुशी प्रदान करता है और उसे मोक्ष का मार्ग खोजने में भी मदद करता है। इसी कारण गीता को 'मोक्षशास्त्र' भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा माना जाता है कि यह ग्रंथ मनुष्यों को जीवन जीने के बेहतर तरीकों के बारे में बतलाता है।
प्रस्ताव में दार्शनिकों का दिया हवाला
प्रस्ताव में दुनिया के विभिन्न देशों और धर्मों का हवाला देते हुए पार्षद कोली ने कहा कि दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और विचारकों ने भगवद्गीता को हमेशा काफी मान-सम्मान दिया है। उन्होंने इसे मानव जीवन के अनंत भवसागर में प्रकाश की एक किरण माना है। भारतीय इसे एक ईश्वरीय और पवित्र ग्रंथ मानते हैं। इसलिए, अदालत में भी इस पर हाथ रखकर शपथ लेना एक प्रथा बन गया है। भगवद्गीता देश में इतिहास दर्शन के सबसे महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथों और मानव में सबसे अहम ग्रंथों में से एक है। इसलिए, बीएमसी द्वारा संचालित स्कूलों में गीता का पाठ किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को सही तरह के संस्कार मिल सके।