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IIT: आईआईटी गुवाहाटी की अनूठी पहल! छात्रों की मानसिक सेहत पर फोकस, अब सैर और काउंसलिंग होगी अनिवार्य

Thu, 13 Mar 2025 04:27 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

IIT Guwahati: गुवाहाटी ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और आत्महत्याओं को रोकने के लिए नई पहल शुरू की है। इसके तहत नए छात्रों के लिए पहले हफ्ते में बातचीत सत्र, शिक्षकों के साथ सुबह की सैर, अनिवार्य काउंसलिंग, मेडिकल जांच और तनाव मुक्ति कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
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आईआईटी गुवाहाटी - फोटो : IIT Guwahati Website
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विस्तार
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IIT: आईआईटी-गुवाहाटी की योजना के तहत नए छात्रों के लिए परिसर में उनके पहले सप्ताह के दौरान बातचीत के सत्र, संकाय सदस्यों के साथ सुबह की सैर, अनिवार्य परामर्श सत्र और व्यापक चिकित्सा जांच तथा तनाव से मुक्ति के लिए कार्यशालाएं आयोजित करना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने और आत्महत्याओं को रोकने की योजना का हिस्सा हैं।

बढ़ती आत्महत्याओं के बाद नई पहल

यह कदम संस्थान में पिछले सेमेस्टर में लगातार दो छात्रों की आत्महत्या के बाद हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद उठाया गया है।
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी के निदेशक देवेंद्र जलिहाल के अनुसार, संस्थान ने छात्रों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है।

उन्होंने कहा, "हमने समग्र कल्याण केंद्र के रूप में एक समर्पित मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श प्रणाली स्थापित की है। इस केंद्र का एक हिस्सा साथी परामर्श क्लब, जिसमें छात्र स्वयंसेवक शामिल हैं। पेशेवर परामर्शदाताओं की मदद से साथी छात्रों को उनके मानसिक और समग्र कल्याण में सहायता करता है।"

छात्रों के लिए नए काउंसलिंग और वेलनेस प्रोग्राम

जालिहाल ने कहा, "हम सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को छात्रावास के विशेष प्रबंधक के रूप में नियुक्त करने पर विचार कर रहे हैं, जो नियमित रूप से छात्रों से बातचीत करेंगे, ताकि उन्हें सहज महसूस हो और वे अपने अनुभव काउंसलरों के साथ साझा करें। यह सब गोपनीय तरीके से किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र भयभीत न हों या उनकी निजता का उल्लंघन न हो।"
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को चिंता और तनाव से निपटने में मदद करने के लिए आहार विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जा रही है।

छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए, कई आईआईटी संस्थान उनके मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए विभिन्न उपाय कर रहे हैं।

आईआईटी-गुवाहाटी में छात्र मामलों के डीन पेरुमल अलगरसामी परिसर में मानसिक कल्याण पहल का नेतृत्व कर रहे हैं।
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नए छात्रों के लिए अनुकूलन कार्यक्रम और पीयर मेंटरशिप

अलगरसामी ने कहा, "हमने निर्णय लिया है कि पहले सप्ताह में जब नए छात्र परिसर में आएंगे तो उनके लिए कक्षाएं नहीं होंगी, बल्कि एक अनुकूलन कार्यक्रम होगा, ताकि वे खुद को असहज महसूस न करें। छात्रों को संकाय सदस्यों के साथ सुबह की सैर के लिए आमंत्रित किया जाएगा, ताकि कक्षा में प्रवेश करने से पहले वे एक-दूसरे के साथ तालमेल बना सकें।"

उन्होंने कहा, "पीयर मेंटरशिप कार्यक्रम नए छात्रों को पीयर मेंटर नियुक्त करके इस धारणा के अनुरूप है। ये मेंटर प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने, संदेहों को दूर करने और विभिन्न चुनौतियों में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, तथा जब नए छात्र खुद को खोया हुआ महसूस करेंगे तो उनके लिए मार्गदर्शक के रूप में काम करेंगे।"

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और बर्फ तोड़ने वाले सत्र

अलगरसामी ने बताया कि जैसे ही नए छात्र परिसर में पहुंचेंगे, एक गर्मजोशीपूर्ण और समावेशी माहौल स्थापित करने तथा आपसी संपर्क को सुगम बनाने के लिए एक बर्फ तोड़ने वाला सत्र आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "इन सत्रों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, साथ ही छात्रों को परामर्श प्रकोष्ठ और समग्र कल्याण केंद्र के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों और सहायता से परिचित कराना है।"

आगे उन्होंने कहा, "ये बर्फ तोड़ने वाले सत्र प्रत्येक छात्रावास में आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों के सामाजिक नेटवर्क का विस्तार करने में मदद मिलेगी, तथा वे मनोरंजक खेलों और गतिविधियों के माध्यम से अपने साथियों के साथ जुड़ सकेंगे।"

तनाव प्रबंधन और 24×7 परामर्श सुविधा

छात्रों को सेमेस्टर परीक्षाओं के दबाव से निपटने में मदद करने के लिए, साथी परामर्श क्लब ने हाल ही में एक तनाव निवारण कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य तनाव से निपटने और उसे प्रबंधित करने तथा उद्यमिता और कैरियर विकल्पों की खोज करने के बारे में ज्ञान साझा करना था।

संस्थान में चार पूर्णकालिक परामर्शदाता हैं, जबकि आईआईटी-गुवाहाटी में स्थापित स्टार्ट-अप योर दोस्त को परामर्शदाताओं तक चौबीसों घंटे पहुंच उपलब्ध कराने के लिए नियुक्त किया गया है।

सभी छात्रों के लिए परामर्शदाताओं के साथ अनिवार्य बातचीत निर्धारित की जाएगी, ताकि किसी भी प्रारंभिक लक्षण की पहचान की जा सके और अनिवार्य व्यापक स्वास्थ्य जांच की जा सके।

अलगरसामी ने कहा, "परामर्श कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया जाएगा कि वह शैक्षणिक समय सारिणी से मेल न खाए। इन अनिवार्य बातचीत से छात्रों को परामर्शदाताओं और परिसर में उपलब्ध परामर्श सेवाओं से परिचित होने में मदद मिलेगी।"

उन्होंने कहा, "इससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए सहायता लेने से जुड़ा कलंक भी दूर होगा, तथा इस बात पर बल दिया जाएगा कि यह पूरी तरह से स्वीकार्य और सामान्य बात है।"

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