पालन नहीं करने पर होगी सख्त कार्रवाई
एनएमसी ने कॉलेजों को चेतावनी देते हुए कहा है बिना स्वीकृति लिए कोई भी छिपी हुई या अतिरिक्त फीस लेना अनाधिकृत माना जाएगा। ऐसा करने वाले संस्थानों पर शो-कॉज नोटिस, जुर्माना, एडमिशन पर रोक और कोर्स की मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इस कदम का उद्देश्य न केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना है, बल्कि छात्रों को छिपी हुई फीस और शोषणकारी इंटर्नशिप शर्तों से भी बचाना है। गौरतलब है कि 2020 में गठित एनएमसी भारत में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल प्रैक्टिस का शीर्ष नियामक निकाय है। इसका काम शिक्षा के मानक तय करना, कॉलेजों और डॉक्टरों की निगरानी करना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार सुझाव देना है।
सात दिनों के भीतर देनी होगी जानकारी
एनएमसी ने साफ किया है कि सभी संस्थानों को नोटिस जारी होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर अपनी फीस और स्टाइपेंड की जानकारी गूगल फॉर्म के जरिए जमा करनी होगी, ताकि सभी छात्रों और अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग फैसलों में मेडिकल कॉलेजों द्वारा फीस छिपाने और इंटर्नशिप में स्टाइपेंड न देने को लेकर चिंता जाहिर की थी।