रोजगार के अवसर :
व्यावसायिक व आवासीय इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किए जाने से वाटर साइंटिस्ट, एन्वायर्नमेंट इंजीनियर, ट्रेंड वाटर कंजर्वेशनिस्ट या वाटर मैनेजमेंट जैसे प्रोफेशनल्स की डिमांड बनी रहेगी। रोजगार के अवसर व्यावसायिक व आवासीय इमारतों में वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किए जाने से वाटर साइंटिस्ट, वाटर मैनेजर, हाइड्रो जियोलॉजिस्ट, बॉयोलाजिस्ट, कंसल्टेंट, वाटर कंजर्वेशनिस्ट जैसे प्रोफेशनल्स के लिए मौके बढ़ गए हैं। तेजी से उभरते ग्रीन जॉब में शुमार इस फील्ड में समुचित पढ़ाई और प्रशिक्षण लेकर आप सरकारी प्रतिष्ठानों से लेकर औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कॉर्पोरेट कंपनीज, एनजीओज एवं हाउसिंग सोसाइटीज में नौकरी तलाश सकते हैं। इसके अलावा, पेयजल आपूर्ति तथा वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट से संबंधित प्लांट्स में भी ऐसे ट्रेंड लोगों की काफी जरूरत देखी जा रही है। रियल स्टेट डेवलपर्स तथा बिल्डर्स भी आजकल अपने प्रोजेक्ट के लिए पानी के प्रबंधन की योजना बनाने के लिए तथा हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के पानी की रीसाइकिलिंग और रीयूज के लिए वाटर मैनेजमेंट बैकग्राउंड के प्रोफेशनल्स की ही सेवाएं ले रहे हैं। चाहें तो पानी के किसी एक एरिया में स्पेशलाइजेशन करके कंसल्टेंट बनकर या फिर किसी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में से जुड़कर भी इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं।
क्या है वाटर हार्वेस्टिंग :
हर साल यह देखने में आया है कि देश में कहीं से बारिश के मौसम में एक क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति होती है। तो दूसरे क्षेत्रों में भयंकर सूखा होता है। इसके प्रमुख कारण है कि वर्षा जल का उचित संचयन न होना या फिर धरती से निकाले गए जल को वापस धरती में न लौटाना। वैज्ञानिक तरीके हैं, जिनमें सबसे कारगर तरीका है वाटर हार्वेस्टिंग। इसका फायदा यह होगा, कि किसानों की मानसून पर निर्भरता कम हो जाएगी और पानी के अभाव में खराब हो रही लाखों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी । उम्मीद है कि गहराते इस जल संकट को दूर करने के लिए आने वाले समय में इस वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल निजी तौर पर भी और अधिक बढ़ेगा।
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आवश्यक योग्यता :
जल प्रबंधन और संरक्षण पर आधारित कई तरह के कोर्स आजकल देश के विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में संचालित हो रहे हैं। जहां से आप वाटर साइंस, वाटर कंजर्वेशन, वाटर मैनेजमेंट, वाटर हार्वेस्टिंग ऐंड मैनेजमेंट नाम से एक ऐसा ही सर्टिफिकेट कोर्स संचालित हो रहा है। जिसे 10वीं के बाद किया जा सकता है। स्टूडेंट्स को बारिश के पानी को संरक्षित करने, वर्षाजल मापन तथा वाटर टेबल आदि बेसिक चीजों की जानकारी दी जाती है। अगर आप बॉयोलॉजी विषय से 12वीं पास है और इस क्षेत्र में कोई अंडरग्रेजुएट कोर्स करना चाहते हैं। तो एक्वा साइंस या वाटर साइंस में बीएससी और एसएससी कर सकते हैं।
मासिक आय :
अभी इस फील्ड में प्रशिक्षित / क्वालिफाइड लोग नहीं है, जितनी मार्केट को इनकी जरूरत है। यही कारण है कि ऐसे प्रोफेशनल्स को इस फील्ड में आने पर शुरूआत से ही काफी अच्छी सैलरी मिल जाती है।
प्रमुख संस्थान :
- इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की
- एमिटी इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, दिल्ली
- एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ एन्वायर्नमेंट साइंसेज, नोएडा
- अन्ना यूनिवर्सिटी