कोरोना महामारी के कारण महाराष्ट्र के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए जालना जिले के एक दूरस्थ गांव के शिक्षक ने ऑनलाइन पढ़ाई कराई। शिक्षक की पहल रंग लाई और बच्चों के माता-पिता को समझा-बुझाकर आवश्यक संसाधन मुहैया कराए गए।
सुदूर गांव में जिला परिषद स्कूल के इस शिक्षक ने यह सुनिश्चित किया कि उसके स्कूल के विद्यार्थियों की शिक्षा में कोई रुकावट पैदा न हो। मार्च-2020 में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद से ऑनलाइन पढ़ाई समय की जरूरत बन गई है। इस कारण स्कूलों और शिक्षकों को विद्यार्थियों तक पहुंचने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
परतूर तहसील के दहिफाल भोगने की एक बस्ती में सरकार द्वारा संचालित स्कूल में शिक्षक पेंटू मैसनवाड़ के सामने अपने विद्यार्थियों को जरूरी उपकरणों और इंटरनेट की सुविधा प्रदान करने की चुनौती थी।
उपकरण खरीदना मुश्किल था
मैसनवाड़ ने कहा, ‘हमारे लिए उपकरण खरीदना और उन्हें संचालित करना बहुत मुश्किल था क्योंकि गांव में नेटवर्क की समस्या है। अभिभावकों के टैबलेट तो दूर साधारण फोन खरीदना भी मुश्किल था। मैंने अभिभावकों और स्थानीय निवासियों को समझाया कि समय बर्बाद नहीं किया जा सकता और पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
मैसनवाड़ ने कहा कि स्थानीय लोगों का योगदान के लिए शुक्रिया। प्राथमिक विद्यालय के सभी 27 बच्चों के पास अब टैबलेट है। बच्चों को इंटरनेट की सुविधा प्रदान करने के लिए तीन डोंगल लगाए गए हैं। गूगल मीट और वाट्सएप के जैसे एप के जरिये विभिन्न विषयों की कक्षाएं ली जा रही हैं।
शिक्षक के प्रयासों की सराहना
मैसनवाड़ अपने सहकर्मी एस यू गायकवाड की मदद से नुक्कड़ कक्षाएं लगाईं और वे गांव में एक मंदिर के परिसर में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य डॉक्टर राजेन्द्र कांबले, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डॉक्टर प्रकाश मानेट समेत विभिन्न अधिकारियों ने गांव का दौरा किया और शिक्षक द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।
डॉक्टर मानटे ने कहा, इससे पहले शिक्षक मैसनवाड़ मंथा तहसील के जयपुर गांव में जिला परिषद विद्यालय में काम करते थे और वहां भी उन्होंने पढ़ाई-लिखाई के नए तरीकों को इस्तेमाल किया था।