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महाराष्ट्र : गडकरी ने की आईएएस अधिकारी के तबादले की मांग, पत्नी के कारण पत्र पर उठे सवाल

Thu, 23 Mar 2023 10:53 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राज्य के चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. अश्विनी जोशी के तबादले की मांग को लेकर लिखे गए पत्र ने विवादित सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Nitin Gadkari - फोटो : Twitter
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विस्तार
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राज्य के चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. अश्विनी जोशी के तबादले की मांग को लेकर लिखे गए पत्र ने विवादित सवाल खड़े कर दिए हैं। नौ मार्च को सीएम शिंदे और मुख्य सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव को लिखे एक पत्र में, गडकरी ने एक आईएएस अधिकारी जोशी की आलोचना की, जिन्होंने कॉलेज ऑफ फिजिशियन और सर्जन-संबद्ध (सीपीएस) द्वारा पेश किए गए पाठ्यक्रमों से जुड़ी लगभग 1100 सीटों पर प्रवेश को रोकने के लिए कहा था।

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संगठन के एक अधिकारी ने कहा कि उनकी पत्नी कंचन गडकरी एसोसिएशन ऑफ सीपीएस संबद्ध संस्थानों के सलाहकार बोर्ड में हैं। सीपीएस पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले लगभग 100 कॉलेजों सदस्य हैं। यह सलाहकार बोर्ड हाल ही में गठित किया गया था। इससे पहले, जोशी ने सीपीएस पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों में गंभीर कमियों और अनियमितताओं पर प्रकाश डालते हुए केंद्र को पत्र लिखा था। मुंबई स्थित सीपीएस एक स्वायत्त निकाय है और पूरे राज्य में दो साल का डिप्लोमा और तीन साल का फेलोशिप मेडिकल कोर्स चलाता है। 

 

एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ बकुल पारेख ने कहा कि कंचन गडकरी एसोसिएशन की प्रशासनिक मामलों पर सलाहकार हैं। केवल एक राजनेता की पत्नी होने से उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।  पारेख के मुताबिक एसोसिएशन का गठन नौ महीने पहले हुआ था और इसके सदस्य समाधान चाहते हैं। लगभग 1100 सीपीएस सीटों पर प्रवेश नहीं हुआ है क्योंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जोशी की टिप्पणियों के बाद काउंसलिंग शुरू नहीं की है। डॉ पारेख ने कहा कि सभी सीपीएस कॉलेज खराब नहीं हैं और 110 साल पुराने संस्थान को बंद करना समाधान नहीं है। 
 
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उधर, जोशी ने अपने पत्रों के माध्यम से कहा है कि जब तक उन्हें सीपीएस से कथित कमियों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तब तक यथास्थिति बनी रहने की संभावना है। उन्होंने 14 मार्च को सीपीएस को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था और 21 मार्च, 2023 तक जवाब देने को कहा था। मामला राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है, ऐसे में कम ही अधिकारी इस पर खुलकर बात करने को तैयार हैं। 
 
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