नौकरी के बदले पैसे और यौन शोषण का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे नौकरी दिलाने के बहाने कई बार उसका यौन शोषण किया।
बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि पीड़िता जूनियर कॉलेज की नौकरी के लिए योग्य नहीं थी, क्योंकि उसके पास स्नातकोत्तर की डिग्री नहीं थी और आरोप लगाया कि यह मामला व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम था।
जमानत का अनुरोध करते हुए वकील ने आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति का भी हवाला दिया और कहा कि वह मधुमेह का मरीज है और उसका इलाज चल रहा है।
हालांकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक संजय मोरे ने तर्क दिया कि कई महिलाओं ने आरोपी के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए हैं और आगे की जांच की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा- गंभीर मामला, जमानत नहीं दी जा सकती
न्यायाधीश शिंदे ने कहा, "शिकायत में लगाए गए आरोपों पर विचार करते हुए, इस स्तर पर रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है। मामले में जांच प्रारंभिक चरण में है।"
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 64(2)(एम) (एक ही महिला से बार-बार बलात्कार), 68 (अधिकार में बैठे व्यक्ति द्वारा संभोग), 69 (धोखेबाज तरीकों आदि का इस्तेमाल करके संभोग), 75 (यौन उत्पीड़न), 79 (महिला की शील का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य), 351(2) (आपराधिक साजिश) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत बनता है।
न्यायाधीश ने कहा, "अपराध की प्रकृति और मामले की जांच जारी रहने को देखते हुए, इस समय आवेदक/आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित मामला नहीं है।"