एबीवीपी ने व्याख्यान को धार्मिक प्रचार करार दिया
रजिस्ट्रार ने बताया कि स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारी को तुरंत व्याख्यान रद्द करने का निर्देश दिया गया। इसी दिन, पूछताछ के बाद, प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग के स्कूल ऑफ हिस्टोरिकल स्टडीज के अध्यक्ष और प्रभारी प्रमुख एसोसिएट प्रोफेसर जे सुंदरराजन ने रजिस्ट्रार को सूचित किया कि "प्रशासनिक कारणों" से 2024-2025 के लिए यह व्याख्यान रद्द कर दिया गया है।
एबीवीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा किया कि उनकी पहल के कारण मद्रास विश्वविद्यालय में इस तरह के धार्मिक व्याख्यान को रोका जा सका। संगठन ने कहा कि "भारत में ईसाई धर्म का प्रसार कैसे किया जाए" जैसे विषय किसी राज्य विश्वविद्यालय में उपयुक्त नहीं हैं और इन्हें धार्मिक प्रचार की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
एबीवीपी के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम को रद्द करने का निर्णय लिया। संगठन ने इसे विश्वविद्यालयों में "पक्षपातपूर्ण विचारधाराओं के प्रसार को रोकने के लिए अपनी प्रतिबद्धता" का प्रमाण बताया।