कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता पीएचए पांडियन द्वारा पेश हलफनामे के हवाले से बताया कि राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 48 विद्यार्थियों को बिना कोचिंग और 3033 को कोचिंग करने के बाद प्रवेश मिला। वहीं, निजी कॉलेजों में बिना कोचिंग 52 और कोचिंग करने वाले 1598 विद्यार्थियों को प्रवेश मिला।
नीट को खत्म क्यों नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि कोचिंग किए बिना प्रवेश पाने वालों की संख्या इतनी कम है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल की पढ़ाई गरीबों के लिए नहीं। सिर्फ उन्हीं को प्रवेश मिलेगा जो लाखों रुपये खर्च करके कोचिंग करेंगे। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार अगर पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को बदल रही है तो नीट परीक्षा को क्यों नहीं बदल सकती?
पिछले माह तमिलनाडु में किसी दूसरे द्वारा नीट देकर एमबीबीएस में प्रवेश लेने का खुलासा हुआ। इसके बाद कोर्ट ने सभी निजी व सरकारी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों से उनके यहां प्रवेश लेने वाले छात्रों की सूची नीट करवाने वाली एजेंसी को 30 अक्तूबर के पहले देने को कहा था।
सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कोर्ट के समक्ष राज्य के 8226 मेडिकल विद्यार्थियों की फिंगरप्रिंट पेश की। वहीं, सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या मेडिकल प्रवेश के लिए नीट परीक्षा में कोई गड़बड़ी की गई है? इस मामले की अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी।