मध्य प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के लभगभग 18 लाख विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के ही अगली कक्षा में दाखिला देने का फैसला लिया था। इसे लेकर अभी तक गाइडलाइन जारी नहीं हुई है, जिससे विद्यार्थी असमंजस में हैं। बता दें कि सूबे में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा कॉलेजों के स्नातक प्रथम और द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के ही आंतरिक मूल्यांकन के जरिए अगली कक्षा व सेमेस्टर में दाखिला मिलेगा।
इस निर्णय के बाद छात्र और अभिभावक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा विभाग में लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि इस फैसले को लेकर गाइडलाइन जारी नहीं होने से विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, विश्वविद्यालयों के पास भी अभी तक लिखित आदेश नहीं पहुंचे हैं।उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त मुकेश शुक्ला का कहना है शासन से मंजूरी मिलते ही निर्देश जारी किए जाएंगे। इस फैसले के बाद अभिभावकों और विद्यार्थियों के कई तरह के सवाल हैं, जिन्हें लेकर अभी तक स्पष्टता नहीं मिली है। विद्यार्थियों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा संबंधी कोर्स में छात्रों को प्रमोशन दिया जाएगा या नहीं? यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के निजी कॉलेजों के छात्रों को भी प्रमोशन का लाभ मिलेगा क्या? विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि यूजी के पहले वर्ष और पीजी के पहले सेमेस्टर में किस आधार प्रमोशन करेंगे क्योंकि इनमें इंटरल परीक्षा भी नहीं होती है।
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बता दें कि सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कोरोना के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के संचालन तथा शालाओं को प्रांरभ करने के संबंध में बैठक ली थी। इसमें स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा दिए ही अगली वर्ष व सेमेस्टर में दाखिला दिए जाने का फैसला लिया गया था। यूजी अंतिम वर्ष एवं पीजी चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षार्थियों के पूर्व वषों व सेमेस्टर्स में से सर्वाधिक अंक प्राप्त परीक्षा परिणाम को प्राप्तांक मानकर अंतिम वर्ष व सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम घोषित होंगे। सीएम का कहना था कि 31 जुलाई को समीक्षा बैठक में निर्णय के बाद कॉलेजों को खोलने पर फैसला लिया जाएगा।