Alliance Formation: जेएनयू छात्र संघ चुनाव 2025-26 को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों आइसा, एसएफआई और डीएसएफ ने संयुक्त रूप से मैदान में उतरने का फैसला किया है। यह गठबंधन एबीवीपी के प्रभाव को चुनौती देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
JNU Election: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ चुनाव 2025-26 में वामपंथी छात्र संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। इसको लेकर गठबंधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सोमवार को नामांकन के दिन स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। वामपंथी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को मात देने के साथ एक भी सीट नहीं गंवाना चाहती है।
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पिछले चुनाव में वामपंथी छात्र संगठनों के बीच आपसी तालमेल की कमी रही थी। अलग-अलग चुनाव लड़ने से सेंट्रल पैनल की चार में से संयुक्त सचिव की सीट एबीवीपी के खाते में चली गई थी। इस बार ऐसी स्थिति न हो उसके लिए वामपंथी छात्र संगठनों ने एक साथ चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार की है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने बताया कि छात्र संघ चुनाव को लेकर आइसा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है।
एबीवीपी को हराने के लिए गठबंधन जरूरी
पिछले चुनाव में आइसा और एसएफआई ने अलग-अलग सेंट्रल पैनल उतारा था। इसका फायदा एबीवीपी को मिला था। एसएफआई दिल्ली के अध्यक्ष सूरज ने कहा कि हम चाहते हैं कि एबीवीपी को हराने के लिए वामपंथी छात्र संगठन मिलकर चुनाव लड़े। एबीवीपी को सेंट्रल पैनल में आने से रोकना हमारा लक्ष्य है।जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा कि पिछली बार भी हम गठबंधन के लिए तैयार थे। इस बार सभी वामपंथी छात्र संगठन एबीवीपी को हराने के लिए एकमत हैं।
नौ हजार से ज्यादा छात्र करेंगे मतदान
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव 2025-26 को लेकर चुनाव समिति ने मतदाताओं की संभावित सूची जारी कर दी है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार एक हजार से ज्यादा मतदाता बढ़ गए हैं। इस चुनाव के लिए 9025 मतदाताओं की संभावित सूची जारी हुई है। हालांकि इसमें सुधार की प्रक्रिया जारी है। सोमवार तक अंतिम सूची जारी होने की उम्मीद है।
एबीवीपी का तंज वामपंथी छात्र संगठनों में हार का डर
एबीवीपी जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि वामपंथी छात्र संगठन पहले से डरे हुए हैं। इसकी वजह हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में सभी सीटों पर एबीवीपी का जीतना है। वहां पर वामपंथी छात्र संगठनों ने अलग-अलग होकर चुनाव लड़ा था। इस हार से उनके अंदर डर बैठ गया है। इस कारण जेएनयू में एकजुट होकर चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। हालांकि उनकी बीच सीटों को लेकर खींचतान अब भी है। वामपंथी छात्र संगठनों का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना है। छात्र हित में काम करना उनका उद्देश्य नहीं है।