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Self-Growth: सीखना भी-सिखाना भी, मार्गदर्शन से बढ़ता है ज्ञान और अनुभव; खुद को निखारने की भी यही है प्रक्रिया

Sat, 13 Dec 2025 04:24 PM IST
शाहीन परवीन मुस्तफा अयूबजादेह, लेक्चरर कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी

सार

Learning and Teaching: मार्गदर्शन केवल दूसरों को सही दिशा दिखाने तक सीमित नहीं है। जब आप किसी को सिखाते हैं या मार्गदर्शन करते हैं, तब आप स्वयं भी नई चीजें सीखते हैं, अपने अनुभव बढ़ाते हैं और अपने ज्ञान को और गहरा करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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Experience Building: जब कोई व्यक्ति मार्गदर्शन करता है, तो वह केवल दूसरों को सलाह देने या सही दिशा दिखाने का काम नहीं करता, बल्कि इस प्रक्रिया में स्वयं भी नई बातें सीखता है और अपने कौशल को बेहतर बनाता है। हर बातचीत में उठने वाले प्रश्न उसे अपने नेतृत्व के दृष्टिकोण पर दोबारा सोचने का अवसर देती है। ऐसे ही मेंटी (मार्गदर्शन लेने वाला) के साथ नियमित संवाद करने से आपकी संप्रेषण क्षमता निखरती है। 

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सक्रिय रूप से सुनने से आप दूसरों की जरूरतों और भावनाओं को बेहतर समझ पाते हैं, जिससे आपकी सहानुभूति बढ़ती है। धीरे-धीरे यह पूरी प्रक्रिया आपको अधिक प्रभावी बनाती है, जिससे आप न केवल अपनी टीम को बेहतर दिशा दे सकते हैं, बल्कि एक प्रेरणादायक वातावरण भी तैयार कर सकते हैं।

बातचीत के साथ बढ़ेगी समझ

मार्गदर्शक को अपने मेंटी से नियमित संवाद करना पड़ता है, और यही निरंतर बातचीत लोगों को गहराई से समझने में मदद करती है। जब आप बार-बार उनके विचार, चुनौतियां और तरीकों को सुनते हैं, तो आप उनके नजरिये को बेहतर पहचानने लगते हैं। इस प्रक्रिया से न केवल आपकी समझ बढ़ती है, बल्कि आप अलग-अलग व्यक्तित्वों के साथ जुड़कर काम करने में भी अधिक कुशल बनते हैं।

सुनने की क्षमता होगी विकसित

मार्गदर्शन में सबसे महत्वपूर्ण है ध्यान से, बिना बीच में टोके सुनना, क्योंकि यही आदत लोगों की जरूरतों और भावनाओं को समझने में सक्षम बनाती है। लगातार ऐसा करने से आपकी सक्रिय रूप से सुनने की क्षमता समय के साथ और मजबूत होती जाती है। इसी प्रक्रिया में आप साफ, ईमानदार और रचनात्मक फीडबैक देना भी सीखते हैं, जिससे बातचीत सार्थक बनती है। साथ ही, आप खुद भी फीडबैक स्वीकार करने की आदत विकसित करते हैं, जो आपको अधिक आत्म-जागरूक और खुला बनाती है।
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नए अनुभवों से सीख मिलेगी

नियमित बातचीत के दौरान आप सीखते हैं कि अपनी बात को स्पष्ट, प्रभावी और प्रेरक तरीके से कैसे प्रस्तुत करना है, जिससे आपका संचार कौशल और मजबूत होता है। साथ ही, मेंटी अक्सर नई पीढ़ी या नए अनुभवों से जुड़े होते हैं, जिनकी मदद से आप नए दृष्टिकोण प्राप्त करते हैं। यह प्रक्रिया आपकी सोच को अपडेट रखती है और उसे परिस्थितियों के अनुसार बेहतर और समझदारी भरे निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।

बनता सकारात्मक माहौल

जब आप स्पष्ट रूप से संवाद करते हैं और लोगों की भावनाओं को समझते हुए सहानुभूति दिखाते हंै, तो टीम के सदस्यों में आपके प्रति भरोसा अपने-आप बढ़ जाता है। ऐसा विश्वास टीम के माहौल को सकारात्मक बनाता है, जिससे लोग खुलकर अपनी बात रखते हैं, जिम्मेदारी महसूस करते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। परिणामस्वरूप, पूरी टीम का प्रदर्शन बेहतर
होता है।                          

-द कन्वर्सेशन
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