पहले स्कूल की पढ़ाई, फिर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
लाल बहादुर शास्त्री की शुरुआती शिक्षा मुगलसराय में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें वाराणसी भेजा गया, जहां उन्होंने हाई स्कूल की शिक्षा हासिल की। किशोरावस्था में ही उनका झुकाव देश के स्वतंत्रता आंदोलन की ओर बढ़ने लगा था।
जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन के दौरान देशवासियों से जुड़ने का आह्वान किया, तब लाल बहादुर शास्त्री की उम्र करीब 16 वर्ष थी। उन्होंने इस आह्वान से प्रभावित होकर अपनी पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के बाद उन्होंने आगे चलकर अपनी पढ़ाई पूरी की।
काशी विद्यापीठ में पूरी की पढ़ाई
लाल बहादुर शास्त्री बाद में वाराणसी के काशी विद्यापीठ (वर्तमान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) से जुड़े। यह ब्रिटिश शासन के विरोध में स्थापित राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों में से एक था। वहां उन्होंने उस दौर के विद्वानों और राष्ट्रवादियों के बीच शिक्षा प्राप्त की।
आखिर ‘शास्त्री’ नाम के साथ कैसे जुड़ा?
यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। काशी विद्यापीठ ने लाल बहादुर को 1925 में ‘शास्त्री’ की उपाधि प्रदान की थी। विद्यापीठ द्वारा दी गई स्नातक डिग्री का नाम ‘शास्त्री’ था और बाद में यही शब्द उनके नाम का हिस्सा बन गया। उन्हें दर्शन एवं मानविकी में शास्त्री की डिग्री प्रदान की गई। इसी वजह से लोग उन्हें शास्त्रीजी कहकर संबोधित करने लगे। यानी शास्त्री उनका जन्म से मिला उपनाम नहीं था। यह शिक्षा से मिली उपाधि थी।
शास्त्री का अर्थ क्या था?
शास्त्री शब्द भारतीय परंपरा में शास्त्रों का अध्ययन करने वाले विद्वान के अर्थ में इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री के मामले में इसे उनके नाम के साथ जोड़ने का सीधा ऐतिहासिक कारण काशी विद्यापीठ से प्राप्त शैक्षणिक उपाधि था।
इसलिए उनके नाम को लेकर यह समझना जरूरी है कि ‘लाल बहादुर’ उनका नाम था और ‘शास्त्री’ काशी विद्यापीठ से प्राप्त उपाधि, जो बाद में उनके सार्वजनिक नाम का अभिन्न हिस्सा बन गई।
पढ़ाई और स्वतंत्रता आंदोलन साथ-साथ चलते रहे
लाल बहादुर शास्त्री के जीवन में शिक्षा और स्वतंत्रता आंदोलन अलग-अलग रास्ते नहीं थे। उन्होंने कम उम्र में राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ी, लेकिन बाद में काशी विद्यापीठ से अपनी शिक्षा पूरी की। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
पढ़ाई की कहानी में छिपी है बड़ी सीख
लाल बहादुर शास्त्री की शिक्षा की कहानी केवल इस सवाल का जवाब नहीं देती कि उन्होंने कहां तक पढ़ाई की। यह उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू को भी सामने लाती है।
उन्होंने पढ़ाई छोड़ी, लेकिन शिक्षा नहीं छोड़ी। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, जेल गए और बाद में अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी की। काशी विद्यापीठ से मिली ‘शास्त्री’ की उपाधि उनके नाम के साथ इस तरह जुड़ी कि आगे चलकर पूरा देश उन्हें लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जानने लगा।