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KVS: केवीएस में कक्षा 6 और 9 के लिए संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य, NEP 2020 तहत लागू होगा तीसरी भाषा का विकल्प

Sun, 14 Jun 2026 11:41 AM IST
Shahin Praveen अमर उजाला, ब्यूरो

सार

Kendriya Vidyalaya: केंद्रीय विद्यालय संगठन ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत एक बड़ा बदलाव किया है। अब कक्षा 6 और 9 में कम से कम एक संस्कृत सेक्शन रखना अनिवार्य होगा, जिससे छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत चुनने का बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
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KVS School - फोटो : ANI
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विस्तार
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NEP 2020: केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत छठी और नौवीं कक्षा में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन अनिवार्य रूप से संचालित किया जाएगा। यह निर्णय नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और त्रिभाषा फॉर्मूले के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत लिया गया है।

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केवीएस ने सभी केंद्रीय विद्यालयों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे 'समागम पोर्टल' पर विद्यार्थियों की ओर से चुनी गई तीसरी भाषा का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करें। इस व्यवस्था के अनुसार छात्र तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत या संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी क्षेत्रीय भाषा का चयन कर सकेंगे। यह भाषा हिंदी (पहली भाषा) और अंग्रेजी (दूसरी भाषा) से अलग होगी।

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KVS और CBSE ने नई भाषा नीति के नियम स्पष्ट किए

केवीएस के अनुसार छात्रों को भाषा चयन की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी, ताकि वे अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार निर्णय ले सकें। हालांकि, स्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षणिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यालयों में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन अनिवार्य रखा गया है। परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समान भाषा चुनने वाले विद्यार्थियों को एक ही सेक्शन में रखा जाएगा, जिससे कक्षा संचालन अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सके। इसके अलावा, स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं के सेक्शन तय करने होंगे।

जिन विद्यालयों में केवल एक सेक्शन है, वहां संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के अलग-अलग बैच बनाए जा सकेंगे। वहीं, जिन विद्यालयों में एक से अधिक सेक्शन हैं, वहां छात्र संख्या के अनुसार दोनों भाषाओं के सेक्शन निर्धारित किए जाएंगे।

सीबीएसई ने हाल ही में नौवीं कक्षा से त्रिभाषा नीति को अनिवार्य करते हुए कहा है कि छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि दसवीं कक्षा में तीसरी भाषा की अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।
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