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सुभाष चंद्र अग्रवाल: जिन्होंने CJI दफ्तर को RTI दायरे में लाने की मुहिम चलाई

Thu, 14 Nov 2019 11:43 AM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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subhash chandra aggarwal - फोटो : Facebook
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही अब मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर भी सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में आएगा। इस ऐतिहासिक फैसले को अमल में लाने का श्रेय जाता है सुभाष चंद्र अग्रवाल को जो आरटीआई कार्यकर्ता हैं। आपको बता रहे हैं कौन हैं सुभाष अग्रवाल और कैसे हुई थी उनकी मुहिम की शुरुआत।

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2007 में शुरू हुई मुहिम  

असल में ये पूरा मामला साल 2007 में शुरू हुआ था। नंवबर 2007 में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से जजों की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी जो उन्हें देने से इनकार कर दिया गया।

इसके बाद सुभाष सीआईसी के पास पहुंचे और सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चूंकि सीजेआई का दफ्तर भी आरटीआई कानून के अंतर्गत आता है, इसलिए उन्हें इस आधार पर सूचना दी जा सकती है। जनवरी 2009 में सीआईसी के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का दफ्तर एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और इसे सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। पीठ ने इसी साल अप्रैल में इस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद अब यह फैसला सुनाया गया है। 

कौन हैं आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल 

सुभाष चंद्र अग्रवाल ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मार्केटिंग और सेल्स मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल किया। सुभाष आईएएस अधिकारी बनना चाहते थे, पर परिवार के दवाब वे पारिवारिक व्यवसाय से ही जुड़ गए।  

अग्रवाल ने एक अखबार को पहला पत्र दिल्ली परिवहन निगम के बस कंडक्टर के बारे में लिखा था। इसमें उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि बस कंडक्टर टिकट के बिना यात्रियों से पैसे वसूल कर रहा है। 

इसके बाद सुभाष ने रेल मंत्रालय के सामने ताज एक्सप्रेस ट्रेन के अनियमित समय के बारे में आवाज उठाई। उन्होंने अबतक अखबारों को 3700 से ज्यादा पत्र लिखे हैं, जिनमें कई प्रकाशित भी हुए हैं। अग्रवाल के नाम पर सबसे अधिक संख्या में संपादक के नाम पत्र प्रकाशित होने का गिनिज रिकॉर्ड भी है। राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाने में भी अग्रवाल की अहम भूमिका थी। 

जिराफ हीरो पुरस्कार से भी सम्मनित हैं अग्रवाल 

अमेरिकी के एक स्वयंसेवी संगठन जिराफ हीरोज प्रोजेक्ट 22 जनवरी 2015 को सुभाष चंद्र अग्रवाल को जिराफ हीरो पुरस्कार 2015 से सम्मानित किया। अग्रवाल को यह पुरस्कार असंख्य चुनौतियों का सामना करते हुए सार्वजनिक भलाई के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 का प्रयोग करने के लिए प्रदान किया गया था। 

किसे मिलता है जिराफ हीरो पुरस्कार 

जिराफ हीरोज प्रोजेक्ट एक गैर लाभकारी समूह है जो जोखिम उठानेवालों, बड़े पैमाने पर अनजान लोगों, वैसे लोग जिनमें अमेरिका और दुनिया के आम लोगों के लिए जोखिम उठाने का साहस है, उन्हें सम्मानित करता है।

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