मोइरंगथेम लोहिया (जिन्होंने यह जंगल तैयार किया है) ने कहा कि उन्हें बचपन से ही विशाल वृक्ष और जंगल उन्हें मोहित करते थे। साथ ही उन्होंने य भी बताया कि जब वो पढ़ाई करके अपने घर पहुंते तो उनके घर के आस-पास एक बड़ा जंगल तबाह हो चुका था जिसके बाद उनका मन बहुत दुखी हुआ और तभी उनके मन में ख्याल आया कि वो पर्यावरण के लिए कुथ करेंगे।
उन्होंने कहा कि जंगल, जिसे अब पुनीशिलोक वन कहा जाता है, 250 पौधों की प्रजातियों का घर है और बांस की 25 प्रजातियां यहां उगाई जाती हैं। उन्होंने कहा, "लोगों को पेड़ काटने के नुकसान को समझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ लोग अलग-अलग प्रजातियों के शिकार के लिए भी आते हैं। लेकिन शुक्र है कि यह सब समय के साथ हल हो गया।"
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