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Kerala University Row: राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रम पर विवाद, रजिस्ट्रार अनिल कुमार निलंबित

Thu, 03 Jul 2025 09:28 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Kerala: केरल विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक निजी कार्यक्रम की मंजूरी रद्द करने के मामले में रजिस्ट्रार के.एस. अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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Kerala University - फोटो : University of kerala Officially
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विस्तार
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Kerala University Row: केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मोहनन कुन्नुमल ने रजिस्ट्रार के.एस. अनिल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी कार्यक्रम को रद्द करने का नोटिस जारी किया था, जिसमें राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम सीनेट हॉल में आयोजित किया गया था, जहां भगवा ध्वज थामे भारत माता का चित्र प्रदर्शित किया गया था। 

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बुधवार को जारी आदेश में कहा गया है कि रजिस्ट्रार ने 25 जून को श्री पद्मनाभ सेवा समिति को सीनेट हॉल के उपयोग की जो मंजूरी दी थी, उसे कार्यक्रम शुरू होने के बाद रद्द कर दिया। उस समय राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, उस समय मंच पर मौजूद थे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कुलपति की कार्रवाई पर उठाए सवाल

रजिस्ट्रार ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि नोटिस राज्यपाल के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले जारी किया गया था और उनके पास इसे साबित करने के लिए सबूत हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और वे कुलपति के फैसले को कानूनी तरीके से चुनौती देंगे।

कुलपति के इस कदम की राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री आर बिन्दु ने तीखी आलोचना की है, जिन्होंने डॉ. कुन्नुममल पर "अपनी शक्तियों का दुरुपयोग" करने का आरोप लगाया है।

मंत्री ने यहां संवाददाताओं को बताया कि संबंधित अधिनियम और नियमों के अनुसार, कुलपति के पास रजिस्ट्रार को निलंबित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सिंडिकेट रजिस्ट्रार की नियुक्ति करने वाला प्राधिकारी के पास यह शक्ति है।

मंत्री ने कहा, "कुलपति मामले को सिंडिकेट के समक्ष रख सकते हैं। इसके अलावा मौजूदा कानून में कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं है।"

निलंबन को लेकर बढ़ा विवाद

अनिल कुमार के इस दावे का हवाला देते हुए कि राज्यपाल के आने से पहले नोटिस जारी किया गया था, मंत्री ने कहा कि निलंबन झूठे आरोप पर आधारित था। बिंदु ने कहा, "यह सत्ता का सरासर दुरुपयोग है।"

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि डॉ. कुन्नुमल को आरएसएस के प्रति अपनी निष्ठा घोषित करने के बाद ही कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया गया था और अब उन्होंने अपने अधिकार का अतिक्रमण कर लिया है।

वामपंथी सिंडीकेट के सदस्यों ने निलंबन पर कड़ी आपत्ति जताई है।

उन्होंने मंत्री के विचार को दोहराते हुए कहा कि कुलपति के पास रजिस्ट्रार को निलंबित करने का अधिकार नहीं है तथा केवल सिंडिकेट ही उप रजिस्ट्रार के पद से ऊपर के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

वामपंथी सिंडीकेट सदस्यों ने दावा किया कि कुलपति के कदम से विश्वविद्यालय की बदनामी हुई है।

इस बीच, इस मुद्दे पर एसएफआई और डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और बुधवार रात राज्यपाल के खिलाफ नारे लगाते हुए राजभवन तक अलग-अलग मार्च निकाला।

छात्रों ने लगाया 'भगवाकरण' का आरोप

पुलिस ने राजभवन की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।

कुछ डीवाईएफआई सदस्यों ने कथित तौर पर पुलिस बैरिकेड्स को पार कर लिया, जिससे राजभवन की सुरक्षा में तैनात कर्मियों के लिए तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।

पुलिस ने संगठन के नेताओं की मदद से स्थिति पर नियंत्रण पाया।

बाद में डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। इस दौरान नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्यपाल कुलपति के जरिए केरल विश्वविद्यालय को "भगवा किला" बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो आरएसएस की विचारधारा से जुड़ा है। उन्होंने इस कोशिश का विरोध करने की कसम खाई।

उन्होंने राज्यपाल पर आरएसएस कार्यालय के निर्देश पर काम करने का भी आरोप लगाया।
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भारत माता के चित्र को लेकर SFI का हंगामा

केरल विश्वविद्यालय सीनेट परिसर में 25 जून को उस समय तनाव फैल गया, जब सत्तारूढ़ माकपा की छात्र शाखा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ झड़प की और राज्यपाल की उपस्थिति में आयोजित समारोह में भारत माता का चित्र प्रदर्शित किए जाने के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।

एसएफआई कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के आयोजकों - पद्मनाभ सेवा समिति और पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक की तथा सीनेट हॉल से चित्र को तत्काल हटाने की मांग की।

जब एसएफआई सदस्यों ने राज्यपाल के आगमन से पहले जबरन हॉल में प्रवेश करने का प्रयास किया तो विरोध प्रदर्शन हाथापाई में बदल गया।

पुलिस ने रास्ता साफ करवाया और प्रदर्शनकारियों को मुख्य परिसर के प्रवेश द्वार से हटाकर राज्यपाल का कार्यक्रम स्थल पर सुचारू प्रवेश सुनिश्चित किया।

जैसे ही स्थिति तनावपूर्ण हुई, विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने कथित तौर पर हस्तक्षेप किया और आयोजकों को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति रद्द कर दी।

हालांकि आयोजकों ने राजभवन को इस घटना की जानकारी दे दी थी, लेकिन राज्यपाल ने विरोध की परवाह किए बिना कार्यक्रम में भाग लेने का निर्णय लिया।
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