अंतिम समय में किए गए बदलाव के विरोध में दायर की गई थी याचिका
यह मामला सीबीएसई बोर्ड के उन छात्रों की याचिका से जुड़ा है जिन्होंने केईएएम (केरल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मेडिकल प्रवेश परीक्षा) दी थी। इन छात्रों ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि 1 जुलाई को, जब रैंक सूची जारी होने में केवल एक घंटा बचा था, राज्य सरकार ने अंतिम अंकों की गणना के नियमों में बदलाव कर दिया।
मूल प्रोस्पेक्टस के आधार पर तैयार करें रैंक सूची
एकल पीठ के रूप में यह मामला सुनने वाले न्यायमूर्ति डी. के. सिंह ने टिप्पणी की थी कि बदलाव का समय "संदिग्ध" प्रतीत होता है। उन्होंने राज्य सरकार के इस कदम को "अवैध, मनमाना और अनुचित" करार दिया और आदेश दिया कि रैंक सूची को 19 फरवरी को जारी किए गए मूल प्रोस्पेक्टस के आधार पर फिर से तैयार किया जाए।
अब खंडपीठ ने भी एकल न्यायाधीश के आदेश को वैध ठहराते हुए कहा है, "हम एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि करते हैं।" खंडपीठ ने यह भी बताया कि इस निर्णय का विस्तृत आदेश आने वाले कुछ दिनों में जारी किया जाएगा।