शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनेगा एआई हब
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर एक समर्पित एआई हब बनाने की भी घोषणा की। यह केंद्र अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) के लिए इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में काम करेगा। इसके माध्यम से स्टार्टअप, निजी कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान और नवाचार के क्षेत्र से जुड़े लोग एक मंच पर आएंगे और एआई आधारित तकनीकों तथा समाधानों के विकास को गति मिलेगी।
एआई हब क्यों बनाया जाएगा?
मुख्यमंत्री ने एआई हब स्थापित करने की भी घोषणा की है।
- यह हब अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में काम करेगा।
- यहां स्टार्टअप्स, कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान और नवाचारकर्ता एक साथ काम कर सकेंगे।
- इसका उद्देश्य एआई आधारित समाधानों के विकास और परीक्षण को तेज करना है।
एआई को बताया सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के दौर की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बनकर उभर रही है। उन्होंने इसकी तुलना भाप इंजन, बिजली, इंटरनेट और मोबाइल तकनीक जैसी ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धियों से की, जिन्होंने दुनिया को बदलकर रख दिया था।
उन्होंने कहा, "कर्नाटक की महत्वाकांक्षा दुनिया के अग्रणी जिम्मेदार एआई केंद्रों में अपनी जगह बनाने की है। बेंगलुरु सिर्फ भारत की तकनीकी राजधानी नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे सक्रिय और ऊर्जावान नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में भी शामिल है।"
सॉफ्टवेयर निर्यात और स्टार्टअप्स में कर्नाटक की मजबूत मौजूदगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत के कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। वहीं, बंगलूरू में 17 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और हजारों ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर दुनिया भर के बाजारों के लिए तकनीकी उत्पाद और सेवाएं विकसित कर रहे हैं।
तकनीक के क्षेत्र में कर्नाटक कितना मजबूत है?
मुख्यमंत्री ने राज्य की तकनीकी ताकत के आंकड़े भी साझा किए।
- कर्नाटक भारत के कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में करीब 40 प्रतिशत योगदान देता है।
- बंगलूरू में 17,000 से अधिक स्टार्टअप्स मौजूद हैं।
- शहर में हजारों ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स वैश्विक बाजार के लिए तकनीकी उत्पाद विकसित कर रहे हैं।
एआई-नेटिव राज्य बनाने की क्या है योजना?
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य कर्नाटक को एक एआई-नेटिव राज्य के रूप में विकसित करना है, जहां प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक इस्तेमाल हो। उनके अनुसार, एआई तकनीक शिक्षकों को बेहतर तरीके से पढ़ाने, डॉक्टरों को बीमारियों की जल्द पहचान करने, किसानों को सटीक सलाह उपलब्ध कराने और नागरिकों को तेज तथा प्रभावी सरकारी सेवाएं देने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को भी प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि एआई के विकास के लिए राज्य में डेटा सेंटर, हाइपरस्केल कंप्यूटिंग सुविधाओं और शोध से जुड़े बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
- शिक्षकों को बेहतर शिक्षण में मदद मिलेगी।
- डॉक्टरों को बीमारियों की जल्दी पहचान करने में सहायता मिलेगी।
- किसानों को बेहतर सलाह और जानकारी मिल सकेगी।
- नागरिकों को तेज और प्रभावी सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
- छोटे कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
गूगल से साझेदारी मजबूत करने की अपील
उन्होंने गूगल की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी ने बंगलूरू को अपने प्रमुख वैश्विक इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार केंद्रों में शामिल किया है। साथ ही उन्होंने गूगल से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुशासन जैसे क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सहयोग देने और छात्रों के लिए सीखने के अवसर बढ़ाने में कर्नाटक के साथ साझेदारी को और मजबूत करने का आग्रह किया।
नवाचार और आजीवन सीखने की संस्कृति अपनाने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने डेवलपर्स, उद्यमियों, शोधकर्ताओं और छात्रों से नवाचार की संस्कृति को आगे बढ़ाने और निरंतर सीखते रहने की सोच को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक न केवल तकनीक के भविष्य को दिशा देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि एआई का विकास नवाचारी होने के साथ-साथ समावेशी, जिम्मेदार और भरोसेमंद भी बना रहे।