प्रमुख उम्मीदवारों की जुबानी जंग
एबीवीपी की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार शिखा स्वराज ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले का हवाला देते हुए भीड़ में जोश भर दिया। उन्होंने पूछा "जो लोग कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, क्या मारे जाने से पहले पीड़ितों से उनका धर्म नहीं पूछा गया था? वामपंथियों ने JNU को विफल कर दिया है। अब समय आ गया है कि ABVP दिखाए कि छात्र अधिकारों के लिए सही मायने में कैसे लड़ा जाए।" स्वराज ने आगे कहा कि अंधेरा है, रात है, ये लाल अंधेरा छटेगा और यह जेएनयू कैंपस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सूरज उगेगा।
AISA के नीतीश कुमार ने कथित चुनावी हेरफेर का तीखा खंडन जारी किया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में यह कोई मेयर का चुनाव नहीं है जिसमें धांधली हो। यह तो जे.एन.यू. है! उन्होंने फैज अहमद की प्रतिष्ठित कविता "चली है रस्म की कोई न सर उठाए चले। जो कोई चाहने वाला तवाफ को निकले नजर चुरा के चले, जिस्म-ओ-जान बचे के चले।" के जरिये भी अपनी बात रखी।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रदीप ढाका ने एक ऐसी कहानी बुनी जो गौतम अडानी से लेकर डोनाल्ड ट्रंप तक, पंजाब के किसानों से लेकर संविधान तक पहुंच गई। उन्होंने गरजते हुए कहा, इस देश को संविधान चलाएगा, कोई संगठन नहीं।'
अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (AIDSO) के सुमन ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक संसाधनों की एक गंभीर तस्वीर पेश की। "पुस्तकालय में कोई पत्रिका नहीं है। कोई फंड नहीं है। हमें HEFA (उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी) से ऋण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हमें भगत सिंह और सुभाष की तरह राजनीति करने की ज़रूरत है।"
गठबंधन और बदली रणनीतियां
अक्सर शोर में डूबे रहने वाले स्वतंत्र उम्मीदवारों ने चुपचाप अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, वाम और दक्षिणपंथी दोनों पर छात्रों की वास्तविक चिंताओं की अनदेखी करने और बड़ी वैचारिक लड़ाई के पक्ष में होने का आरोप लगाया। इस साल के चुनावों में बड़े पैमाने पर पुनर्संयोजन देखने को मिले हैं। लंबे समय से चली आ रही यूनाइटेड लेफ्ट बिखर गई है। AISA ने डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) के साथ गठबंधन किया है, जबकि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA), AISF और PSA ने एक और गुट बनाया है।
ABVP ने एक पूरा पैनल मैदान में उतारा है: शिखा स्वराज (अध्यक्ष), निट्टू गौतम (उपाध्यक्ष), कुणाल राय (महासचिव), और वैभव मीना (संयुक्त सचिव)। आइसा-डीएसएफ गठबंधन से: नीतीश कुमार (अध्यक्ष), मनीषा (उपाध्यक्ष), मुन्तेहा फातिमा (महासचिव) और नरेश कुमार (संयुक्त सचिव)।
वोटिंग और नतीजे
मतदान के लिए पात्र 7,906 छात्रों में से 57 प्रतिशत पुरुष और 43 प्रतिशत महिलाएं हैं, इसलिए यह लड़ाई बहुत ही कड़ी और व्यक्तिगत है। मतदान 25 अप्रैल को दो सत्रों में होगा: सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक। मतगणना उसी रात शुरू होगी और परिणाम 28 अप्रैल तक आने की उम्मीद है।