छात्रसंघ ने की इस्तीफे की मांग
छात्रसंघ के अनुसार 16 फरवरी को जारी 52 मिनट के एक पॉडकास्ट में कुलपति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों, छात्रसंघ पदाधिकारियों के निष्कासन और विश्वविद्यालय की छवि जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी। छात्रसंघ का कहना है कि इस दौरान दिए गए कुछ बयान आपत्तिजनक थे। संघ ने बयान जारी कर कुलपति से इस्तीफे की मांग की और कहा कि ऐसे वक्तव्यों से विश्वविद्यालय की गरिमा प्रभावित होती है।
छात्रसंघ ने विशेष रूप से उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि स्थायी रूप से पीड़ित बने रहने या पीड़ित होने का दावा करने से प्रगति नहीं हो सकती। संघ का आरोप है कि यह टिप्पणी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर सामाजिक अन्याय और बहिष्कार की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करती है।
क्या है कुलपति का पक्ष?
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कुलपति ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं पिछड़े वर्ग की पृष्ठभूमि से आती हैं।
छात्रसंघ ने 21 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर विरोध दिवस मनाने की अपील की है और देशभर के छात्र संगठनों से इसमें शामिल होने का आग्रह किया है। मामला फिलहाल विवाद का विषय बना हुआ है।