JNU's 8th Convocation: जितना हो सके उतना पढ़ें, जोखिम उठाने के लिए तैयार रहें, टीम में काम करना सीखें। चुनौतियों सामने आने पर उनसे पार पाएं और आलोचनाओं से डरें नहीं। इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने नवाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दीक्षांत समारोह में कुल 2721 डिग्रियां प्रदान की गई।
जेएनयू में बृहस्पतिवार को आठवा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. श्रीधर सोमनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने सभी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि जेएनयू अपनी शोध क्षमताओं, अकादमिक नेतृत्व और बौद्धिक विकास के लिए जाना जाता है।
मैं छात्रों को कुछ सुझाव देना चाहूंगा कि जितना हो सके उतना पढ़ें, टीम में काम करना सीखें, जोखिम उठाने के लिए तैयार रहें। उन्होंने आगे कहा कि जब मैं इसरो में शामिल हुआ तो बहुत सारी समस्याएं और असफलताएं थीं।
लेकिन, उस समय से लेकर अब तक हमने जो भी नाम कमाया है वह कई लोगों के योगदान की वजह है। इसलिए टीम बनाना महत्वपूर्ण है। समारोह में अतिथि के रूप में अल्ट्रा इंटरनेशनल लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष और सीईओ संत कुमार सांगानेरिया, जेएनयू के चांसलर और भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित के अलावा छात्र, अभिभावक और संकाय सदस्य शामिल हुए।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि छात्र अपने माता-पिता, शिक्षकों और कर्मचारियों को धन्यवाद दें जिन्होंने आपके लिए यह संभव बनाया है। जेएनयू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शोध और शिक्षाविदों के लिए जाना जाता है।