परीक्षा रद्द करने की वजह फंड की कमी
इस संबंध में सभी स्कूलों के डीन और स्पेशल सेंटर को पत्र भी लिखा गया। सभी ने जेएनयू प्रवेश परीक्षा कराने को लेकर अपने विचार दिए। फिर दोबारा से एक बैठक बुलाई गई, उसमें दो कारणों से प्रवेश परीक्षा न कराने का निर्णय लिया। इसमें फंड न होना भी एक कारण बताया गया। पीएचडी जेएनयू प्रवेश परीक्षा के लिए प्रशासन को लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। जेएनयू प्रवेश परीक्षा दोबारा से लाने को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा कि नए पीएचडी दाखिलों का सत्र नजदीक आ रहा है। ऐसी अफवाह थी कि जून में होने वाले यूजीसी नेट के अंकों को दाखिले के मानदंडों में शामिल नहीं किया जाएगा। जब इस बारे में दाखिला निदेशक से बात की तो उन्होंने ऐसा कोई भी निर्णय न लिए जाने की जानकारी दी। प्रोस्पेक्टस में ऐसी कोई बात शामिल नहीं होने जा रही है। जून में यूजीसी नेट देने वाले छात्र भी दाखिले के पात्र होंगे, छात्र अफवाहों पर ध्यान न दें।