दो नोटिस जारी हुए
दोनों नोटिसों में छात्रों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय के भीतर जुर्माना न भरने पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें छात्रावास से निष्कासन भी शामिल है। इस मामले पर छात्रावास के वार्डन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
पहले नोटिस में 80,000 का जुर्माना
पहले नोटिस में लिखा था, "आपके कमरे में 12 अज्ञात व्यक्ति शराब पीते हुए पाए गए तथा आपकी अनुपस्थिति में छात्रावास परिसर में उत्पात मचाते हुए पाए गए। यह व्यवहार छात्रावास के नियमों का गंभीर उल्लंघन है।"
छात्र पर 80,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें बाहरी लोगों के अनधिकृत प्रवेश के लिए 60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। शराब पीने के लिए 2,000 रुपये, इंडक्शन स्टोव और हीटर रखने के लिए 6,000 रुपये, हुक्का उपयोग के लिए 2,000 रुपये और आक्रामक व्यवहार, आधिकारिक मामलों में हस्तक्षेप और छात्रावास के कर्मचारियों को धमकाने के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना शामिल हैं।
दूसरे नोटिस में छात्र पर 99 हजार का जुर्माना
दूसरे नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पिछले साल 22 दिसंबर और 5 जनवरी को एक अन्य छात्र के कमरे में कई बाहरी लोग मौजूद थे, जहां शराब पी गई थी। इसमें आगे दावा किया गया है, "उस समय वार्डन कमेटी और सुरक्षाकर्मियों ने आपका कमरा खोलने का प्रयास किया, लेकिन आपने दरवाजा नहीं खोला।"
छात्र पर 99,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। दो बार अनधिकृत व्यक्तियों को अनुमति देने के लिए 85,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। शराब पीने के लिए 2,000 रुपये, हुक्का रखने के लिए 2,000 रुपये और आक्रामक और विघटनकारी व्यवहार के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार छात्र पर कुल 99 हजार का जुर्माना लगाया गया।
भविष्य के लिए तत्काल निष्कासित करने की चेतावनी
नोटिस में चेतावनी दी गई है, "भविष्य में किसी भी शिकायत या उल्लंघन के परिणामस्वरूप आपको बिना किसी पूर्व सूचना के छात्रावास से तत्काल निष्कासित कर दिया जाएगा।"
छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष ने जुमाने को बताया जबरन वसूली
सतलुज छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष कुणाल कुमार ने जुर्माने की आलोचना करते हुए इसे जबरन वसूली का कृत्य बताया। उन्होंने आरोप लगाया, "एक विश्वविद्यालय में जहां सेमेस्टर शुल्क केवल 200 रुपये है, छात्रों पर 1 लाख रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। ये जुर्माना उन लोगों पर लगाया जा रहा है जो एबीवीपी का समर्थन नहीं करते हैं।"