गुरुवार को एक बयान में, जेएनयू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने घोषणा की कि जेएनयू अपनी खुद की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर विचार कर रहा है। जेएनयूटीए ने कहा कि कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने पीएचडी प्रवेश के लिए जेएनयू द्वारा अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की पुरानी प्रणाली को खोलने के लिए 3 जुलाई 2024 को निर्णय लिया।
विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस तरह के विचार चल रहे हैं।
पिछले साल से ही शिक्षकों और छात्रों ने एनटीए द्वारा संचालित परीक्षा में आने वाली समस्याओं को उजागर किया है। छात्र और शिक्षक मांग कर रहे हैं कि विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी फिर से संभाले।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कई सालों से परीक्षा आयोजित कर रही थी। पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश पाने के इच्छुक उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा देनी होती थी। इस साल, जेएनयू ने अपने डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी चयन प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की है।
वर्तमान शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत में जेएनयू ने कहा थी कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के बजाय राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) के स्कोर को स्वीकार करेगा।
बयान में जेएनयूटीए ने कहा, "यह 3 जुलाई 2024 को कुलपति और स्कूलों के डीन की बैठक में लिए गए निर्णयों का स्वागत करता है, साथ ही इस मामले को स्कूलों/केंद्रों के संकाय को उनकी राय के लिए संदर्भित करता है।"
19 जून को, केंद्र ने गृह मंत्रालय (एमएचए) से यूजीसी नेट परीक्षा की अखंडता से समझौता होने की संभावना की सूचना मिलने के बाद विश्वविद्यालयों में प्रवेश स्तर की शिक्षण नौकरियों और पीएचडी प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा को रद्द कर दिया था।