JNUSU ने फैसले का विरोध किया
जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि किसी पुस्तक पर चर्चा करना विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और लोकतांत्रिक संस्कृति का अहम हिस्सा होता है।
कहा, "इस कार्यक्रम के आयोजन स्थल को रद्द करके, जेएनयू प्रशासन ने एक बार फिर अपने विद्यार्थी-विरोधी और बुद्धिजीवी-विरोधी एजेंडे को उजागर किया है, जो विश्वविद्यालय के स्वतंत्र विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के बजाय आलोचनात्मक चिंतन को दबाने और असहमति की आवाजों को चुप कराने का प्रयास करता है।"