परिवार का पूरा सहयोग मिला
सिद्धांत का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे परिवार और शिक्षकों का संयुक्त प्रयास है। महामारी उनकी तैयारी के लिए वरदान बनकर आई, क्योंकि इस दौरान उनके आने-जाने के दो घंटे बचे और वह पढ़ाई में लगे। उनका कहना है कि हालांकि इस दौरान शारीरिक गतिविधि कम होने से वह सुस्त जरूर हो गए थे।
एनसीईआरटी किताबों को बताया सफलता का राज
सिद्धांत का कहना है कि उन्होंने जेईई की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा एनसीईआरटी की किताबों पर ध्यान दिया। एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा से ज्यादा पढ़ा। पूरे नंबर लाने के लिए सटीकता पर काम किया । इसके अलावा, कोचिंग की टीचिंग कार्यप्रणाली ने सफलता में उनकी मदद की। हालांकि, सिद्धांत का कहना है कि जेईई मेन में सफलता के लिए सबसे ज्यादा अहम आपका हार्ड वर्क और जुनून होता है।