आईआईटी रुड़की ने तकनीकी गड़बड़ी और डेटा सुरक्षा पर दी सफाई
संस्थान ने बताया कि 2 जून को कुछ तकनीकी सुधार तुरंत किए गए थे, ताकि जिन छात्रों को एडमिट कार्ड और रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही थी, उनकी मदद की जा सके और प्रक्रिया सही तरीके से चलती रहे। संस्थान ने आगे कहा कि इन हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप क्लाउड स्टोरेज घटक में "मामूली, अस्थायी त्रुटि" हुई, जिसकी पहचान एथिकल हैकर रायलेन अनिल ने की और इसकी सूचना दी।
संस्थान ने बताया, “एक एथिकल हैकर, श्री रायलेन अनिल ने इस त्रुटि का पता लगाया और बताया कि वे संबंधित डेटाबेस तक पहुंच सकते हैं। समस्या को तुरंत ठीक कर लिया गया और डेटा तक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई।”
आईआईटी रुड़की ने कहा कि प्रभावित स्टोरेज “रीड ओनली” था, जिसका अर्थ है कि कोई भी डेटा संपादित या हटाया नहीं जा सकता था। संस्थान ने आगे कहा कि क्लाउड एक्सेस लॉग के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि कोई बल्क डाउनलोड नहीं हुआ था।
संस्थान ने कहा, “प्रभावित स्टोरेज रीड ओनली था, जिसका अर्थ है कि कोई भी डेटा संपादित या हटाया नहीं जा सकता था। क्लाउड एक्सेस लॉग के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि कोई बल्क डाउनलोड नहीं हुआ (रीड ओनली एक्सेस डेटा के 0.05 प्रतिशत से भी कम तक सीमित था)।”
IIT रुड़की का दावा-कोई डेटा लीक नहीं, परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित
संस्थान ने आगे कहा कि “कोई भी संवेदनशील जानकारी लीक या बड़े पैमाने पर निकाली नहीं गई” और इस घटना का “परीक्षा परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, जिसमें उम्मीदवारों के अंक, रैंक और श्रेणी शामिल हैं।”
आईआईटी रुड़की ने कहा कि वह जेईई (एडवांस्ड) और जोसा काउंसलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
इसमें कहा गया, "इस तकनीकी घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और परीक्षा प्रणाली में जनता के विश्वास को कमज़ोर करने के जानबूझकर किए गए प्रयास बेहद चिंताजनक हैं और इन्हें रोका जाना चाहिए।"
इसमें आगे कहा गया, "जेईई (एडवांस्ड) टीम आईआईटी और आईआईएससी में सुगम और सुरक्षित प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से प्रत्येक उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए तत्पर है।"
आईआईटी रुड़की ने जेईई एडवांस्ड डेटा सुरक्षा पर दी सफाई
आईआईटी-रुड़की ने बताया कि जेईई (एडवांस्ड) 2026 के परिणाम पोर्टल में क्लाउड स्टोरेज से जुड़ी एक तकनीकी समस्या सामने आई थी।
यह मामला तब सामने आया जब 16 वर्षीय साइबर सुरक्षा शोधकर्ता रायलेन अनिल ने दावा किया कि पोर्टल का डेटा बिना अनुमति के देखा जा सकता था और इससे लाखों छात्रों की जानकारी प्रभावित हो सकती थी।
संस्थान ने स्पष्ट किया कि सभी डेटा केवल “रीड-ओनली” मोड में था, यानी उसमें कोई बदलाव या डिलीट नहीं किया जा सकता था।
आईआईटी-रुड़की ने यह भी कहा कि इस तकनीकी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ठीक किया जा रहा है।