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जेईई एडवांस: 1+ लाख छात्रों में सिर्फ 209 ने हल किया गणित का ये सवाल, रिपोर्ट ने खोली परीक्षा की कठिनाई की पोल

सीमा शर्मा, अमर उजाला Published by: शिवम तिवारी Updated Wed, 07 Oct 2026 07:48 AM IST

सार

JEE Advanced 2026: जेईई एडवांस 2026 की रिपोर्ट में परीक्षा के कठिन स्तर का खुलासा हुआ है। गणित के एक सवाल में 1.80 लाख छात्रों में सिर्फ 209 को पूरे अंक मिले। 26 सवालों में पांच फीसदी से कम छात्रों ने पूर्ण अंक हासिल किए। आंकड़ों ने परीक्षा की कठिनाई और दो चरणों वाली चयन प्रक्रिया पर बहस बढ़ा दी है।
 
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जेईई एडवांस-2026 की रिपोर्ट - फोटो : AI Generated
आईआईटी में दाखिले के लिए आयोजित जेईई एडवांस 2026 में देशभर से करीब 1.80 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। अब परीक्षा कमेटी की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने इसके कठिनाई स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। गणित के नौवें सवाल पर सिर्फ 209 छात्रों को पूरे अंक मिले। यानी करीब 861 छात्रों में से केवल एक छात्र ही इस सवाल को पूरी तरह सही हल कर पाया। वहीं 61,487 छात्रों ने इस सवाल को हल करने की कोशिश तक नहीं की। करीब 1.18 लाख छात्रों ने इसका उत्तर लिखा, लेकिन इनमें से 1.17 लाख से ज्यादा छात्रों का जवाब गलत रहा।

कितने सवाल बेहद कठिन रहे?

जेईई एडवांस 2026 की आधिकारिक रिपोर्ट में गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के दोनों पेपरों के हर सवाल पर छात्रों के प्रदर्शन का ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 26 सवाल ऐसे रहे, जिनमें पांच फीसदी से भी कम छात्रों को पूरे अंक मिल सके। वहीं केवल चार सवाल ऐसे थे, जिनमें आधे या उससे ज्यादा छात्रों ने पूरे अंक हासिल किए। इनमें गणित के दो सवाल और भौतिकी तथा रसायन विज्ञान का एक-एक सवाल शामिल था। ये आंकड़े बताते हैं कि परीक्षा में कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें सही उत्तर तक पहुंचना छात्रों के लिए काफी मुश्किल रहा।

आंशिक अंकों से कितनी राहत मिली?

कुछ सवालों में छात्रों को आंशिक अंक मिलने से स्थिति थोड़ी बेहतर रही। गणित के पहले पेपर के आठवें सवाल में 4.12 फीसदी छात्रों को पूरे अंक मिले, जबकि 40.66 फीसदी छात्रों को आंशिक अंक मिले। यानी कुल 44.78 फीसदी छात्र इस सवाल से कुछ अंक हासिल करने में सफल रहे। रसायन विज्ञान के पहले पेपर के पांचवें सवाल में भी ऐसी ही स्थिति रही। यहां केवल 3.79 फीसदी छात्रों को पूरे अंक मिले, लेकिन 50.43 फीसदी छात्रों को आंशिक अंक मिले। इससे पता चलता है कि कुछ सवाल पूरी तरह सही करने के बजाय आंशिक रूप से हल करने पर छात्रों को अंक मिल सके।

किन सवालों में सबसे कम सफलता मिली?

गणित के पहले पेपर के 11वें सवाल में सिर्फ 1,298 छात्रों यानी 0.72 फीसदी को पूरे अंक मिले। वहीं दूसरे पेपर के 10वें सवाल में केवल 1,175 छात्रों यानी 0.65 फीसदी ने पूरे अंक हासिल किए। इसी सवाल में 66.17 फीसदी छात्रों का उत्तर गलत रहा। रसायन विज्ञान के दूसरे पेपर के 15वें सवाल में केवल 988 छात्र यानी 0.55 फीसदी ही सही जवाब दे सके। भौतिकी के दूसरे पेपर के 14वें सवाल में भी कठिनाई साफ दिखी, जहां 74.84 फीसदी छात्रों का उत्तर गलत रहा। यानी कई प्रश्नों ने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को उलझाया।

क्या दो परीक्षाओं का दबाव बढ़ रहा है?

शिक्षाविद और प्रवेश परीक्षा विशेषज्ञ केशव अग्रवाल के अनुसार, रिपोर्ट छात्रों के तनाव से जुड़ी एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। उनका कहना है कि छात्रों को पहले JEE Main और फिर JEE Advanced जैसी दो बड़ी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। दोनों परीक्षाओं में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित ही मुख्य विषय हैं, लेकिन JEE Advanced में समस्या हल करने की क्षमता को और गहराई से परखा जाता है। उनके मुताबिक IIT की चयन व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। केवल JEE Main में कुछ कठिन सवाल जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। चयन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए परीक्षा के चरण, तनाव और अतिरिक्त तैयारी के बोझ को कम करने के तरीकों पर अध्ययन जरूरी है।
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जेईई एडवांस-2026 की रिपोर्ट - फोटो : AI Generated
आईआईटी में दाखिले के लिए आयोजित जेईई एडवांस 2026 में देशभर से करीब 1.80 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। अब परीक्षा कमेटी की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने इसके कठिनाई स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। गणित के नौवें सवाल पर सिर्फ 209 छात्रों को पूरे अंक मिले। यानी करीब 861 छात्रों में से केवल एक छात्र ही इस सवाल को पूरी तरह सही हल कर पाया। वहीं 61,487 छात्रों ने इस सवाल को हल करने की कोशिश तक नहीं की। करीब 1.18 लाख छात्रों ने इसका उत्तर लिखा, लेकिन इनमें से 1.17 लाख से ज्यादा छात्रों का जवाब गलत रहा।

कितने सवाल बेहद कठिन रहे?

जेईई एडवांस 2026 की आधिकारिक रिपोर्ट में गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के दोनों पेपरों के हर सवाल पर छात्रों के प्रदर्शन का ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 26 सवाल ऐसे रहे, जिनमें पांच फीसदी से भी कम छात्रों को पूरे अंक मिल सके। वहीं केवल चार सवाल ऐसे थे, जिनमें आधे या उससे ज्यादा छात्रों ने पूरे अंक हासिल किए। इनमें गणित के दो सवाल और भौतिकी तथा रसायन विज्ञान का एक-एक सवाल शामिल था। ये आंकड़े बताते हैं कि परीक्षा में कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें सही उत्तर तक पहुंचना छात्रों के लिए काफी मुश्किल रहा।

आंशिक अंकों से कितनी राहत मिली?

कुछ सवालों में छात्रों को आंशिक अंक मिलने से स्थिति थोड़ी बेहतर रही। गणित के पहले पेपर के आठवें सवाल में 4.12 फीसदी छात्रों को पूरे अंक मिले, जबकि 40.66 फीसदी छात्रों को आंशिक अंक मिले। यानी कुल 44.78 फीसदी छात्र इस सवाल से कुछ अंक हासिल करने में सफल रहे। रसायन विज्ञान के पहले पेपर के पांचवें सवाल में भी ऐसी ही स्थिति रही। यहां केवल 3.79 फीसदी छात्रों को पूरे अंक मिले, लेकिन 50.43 फीसदी छात्रों को आंशिक अंक मिले। इससे पता चलता है कि कुछ सवाल पूरी तरह सही करने के बजाय आंशिक रूप से हल करने पर छात्रों को अंक मिल सके।

किन सवालों में सबसे कम सफलता मिली?

गणित के पहले पेपर के 11वें सवाल में सिर्फ 1,298 छात्रों यानी 0.72 फीसदी को पूरे अंक मिले। वहीं दूसरे पेपर के 10वें सवाल में केवल 1,175 छात्रों यानी 0.65 फीसदी ने पूरे अंक हासिल किए। इसी सवाल में 66.17 फीसदी छात्रों का उत्तर गलत रहा। रसायन विज्ञान के दूसरे पेपर के 15वें सवाल में केवल 988 छात्र यानी 0.55 फीसदी ही सही जवाब दे सके। भौतिकी के दूसरे पेपर के 14वें सवाल में भी कठिनाई साफ दिखी, जहां 74.84 फीसदी छात्रों का उत्तर गलत रहा। यानी कई प्रश्नों ने बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को उलझाया।

क्या दो परीक्षाओं का दबाव बढ़ रहा है?

शिक्षाविद और प्रवेश परीक्षा विशेषज्ञ केशव अग्रवाल के अनुसार, रिपोर्ट छात्रों के तनाव से जुड़ी एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। उनका कहना है कि छात्रों को पहले JEE Main और फिर JEE Advanced जैसी दो बड़ी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। दोनों परीक्षाओं में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित ही मुख्य विषय हैं, लेकिन JEE Advanced में समस्या हल करने की क्षमता को और गहराई से परखा जाता है। उनके मुताबिक IIT की चयन व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। केवल JEE Main में कुछ कठिन सवाल जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। चयन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए परीक्षा के चरण, तनाव और अतिरिक्त तैयारी के बोझ को कम करने के तरीकों पर अध्ययन जरूरी है।
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