जनजातीय गौरव दिवस देश के आदिवासी समुदायों के इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करने का खास अवसर है। हर साल 15 नवंबर को यह दिवस मनाया जाता है। यह तारीख भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी है, जिन्हें आदिवासी समाज में बड़े सम्मान से याद किया जाता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। वर्ष 2026 में इसका छठा आयोजन होगा। इस बार 1 से 15 नवंबर तक देशभर में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाया जाएगा।
सीबीएसई ने स्कूलों से क्या कहा?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 30 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। इसमें बोर्ड से जुड़े सभी स्कूलों के प्रमुखों से 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाने की अपील की गई है। बोर्ड चाहता है कि विद्यार्थी आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और जनजातीय समुदायों की संस्कृति के बारे में जानें। स्कूलों से कहा गया है कि वे अपनी सुविधा और विद्यार्थियों की उम्र के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों का मकसद केवल एक दिन उत्सव मनाना नहीं, बल्कि बच्चों को देश के इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी है।
स्कूलों में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
स्कूलों में जनजातीय कला, संगीत, नृत्य, हस्तकला और परंपराओं से जुड़ी गतिविधियां कराई जा सकती हैं। विद्यार्थियों के लिए निबंध, भाषण, चित्रकला, कविता और प्रश्नोत्तरी जैसी प्रतियोगिताएं भी रखी जा सकती हैं। इनका विषय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान, जनजातीय इतिहास और उनकी सांस्कृतिक विरासत हो सकता है। स्कूल विशेष प्रार्थना सभा आयोजित कर सकते हैं और अपने क्षेत्र के जनजातीय समाज से जुड़े उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को सम्मानित कर सकते हैं।
बिरसा मुंडा को क्यों किया जाएगा याद?
जनजातीय गौरव दिवस का मुख्य उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा और दूसरे आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान देना है। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। आदिवासी समाज उन्हें धरती आबा के नाम से भी याद करता है। 15 नवंबर को उनकी जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में बिरसा मुंडा और दूसरे जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि दी जा सकती है। विद्यार्थियों को उनके जीवन, संघर्ष और देश की आजादी की लड़ाई में जनजातीय समुदायों की भूमिका के बारे में बताया जाएगा। इससे बच्चों को इतिहास के उन नायकों को जानने का मौका मिलेगा, जिनका योगदान अक्सर कम चर्चा में आता है।
कार्यक्रमों की जानकारी कहां जमा करनी होगी?
सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि वे अपने यहां होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार रखें। इसके लिए कार्यक्रमों की तस्वीरें, वीडियो और छोटी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी। स्कूल इस जानकारी को जनजातीय कार्य मंत्रालय के विशेष पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। इसके लिए बोर्ड ने यह लिंक दिया है: जनजातीय गौरव दिवस पोर्टल। इसके अलावा स्कूल तस्वीरों, वीडियो और कार्यक्रम के संक्षिप्त विवरण के साथ इस गूगल फॉर्म के जरिए भी जानकारी साझा कर सकते हैं।
पखवाड़े में देशभर में क्या होगा?
जनजातीय गौरव पखवाड़ा केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र और राज्य स्तर पर भी जनजातीय समुदायों की संस्कृति, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान स्वास्थ्य जांच और पोषण शिविर, सांस्कृतिक आयोजन तथा जनजातीय विकास से जुड़ी परियोजनाओं के कार्यक्रम भी होंगे। नई डिजिटल सुविधाएं शुरू करने और जनजातीय समुदायों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। इस पूरे आयोजन का मकसद आदिवासी समाज के योगदान को पहचान देना और उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।