नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव का संविधान बनाने के लिए ड्राफ्ट टीम में प्रोफेसर, कानूनी विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि छात्र प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। जिससे ड्राफ्ट तैयार करने को लेकर किसी प्रकार का गतिरोध पैदा न हो। जामिया प्रशासन ने 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव के आयोजन को मंजूरी दी है। अगले साल नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने के छह सप्ताह के अंदर चुनाव का आयोजन होगा। छात्र संघ चुनाव संविधान के ड्राफ्ट को 15 मई 2027 तक मंजूरी देकर लागू किया जाएगा।
छात्र संघ चुनाव लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार होगा। जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिजवी के अनुसार ड्राफ्ट बनाने के लिए हर फैकल्टी से छात्र प्रतिनिधि भी लेंगे ताकि लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों का प्रतिनिधित्व और विचार मिल सकें। इसके बाद ड्राफ्ट को हितधारकों को टिप्पणी के लिए भेजा जाएगा। फिर ड्राफ्ट की कानूनी समीक्षा करवाने के बाद उसे अकादमिक परिषद और कार्यकारिणी परिषद में भेजा जाएगा। आखिर में ड्रॉफ्ट को मंजूरी के लिए विजिटर नॉमिनी के पास भेजा जाएगा।
18 दिन तक छात्रों ने किया आंदोलन
जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 12 अक्तूबर से शुरू हुई भूख हड़ताल 18 दिनों तक चली। जिसके बाद प्रशासन ने बृहस्पतिवार रात को छात्र संघ संविधान को मंजूरी देने और उसे लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी करने के आदेश जारी किए। इसके बाद चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। चुनाव के लिए जामिया ने 16 जुलाई 2027 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के छह सप्ताह की समयसीमा तय की है।
जामिया चुनाव निलंबन की थी यह वजह
वहीं जामिया में हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कभी-कभार कक्षाओं में बाधा डालने की लगातार घटनाओं के बाद वर्ष 2006 में जामिया छात्र संघ को निलंबित कर दिया गया था। जामिया में आखिरी बार छात्र संघ का चुनाव वर्ष 2005 में हुआ था। एक बार वर्ष 2022 में छात्र संघ चुनाव को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी गया। लेकिन कोर्ट ने चुनाव कराने का निर्देश दिए बिना मामले का निपटारा कर दिया था।
क्या 2022 में भी उठा था चुनाव का मामला?
जामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग पहले भी अदालत तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2022 में इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया था। हालांकि, अदालत ने विश्वविद्यालय को चुनाव कराने का निर्देश दिए बिना ही मामले का निपटारा कर दिया था। इसके बाद भी परिसर में छात्र संघ चुनाव की मांग उठती रही। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव कराने की मंजूरी मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। यदि तय समयसीमा के अनुसार संविधान तैयार होकर लागू हो जाता है, तो नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों को करीब 20 साल बाद अपना छात्र प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिल सकता है।