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आईपीएस अधिकारियों के लिए नया नियम: तकनीक-साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग जरूरी, वार्षिक रिपोर्ट पर भी पड़ेगा असर?

Sat, 10 Oct 2026 10:19 AM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

आईपीएस अधिकारियों के लिए नई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साधनों से जुड़े प्रशिक्षण पाठ्यक्रम अनिवार्य किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का रिकॉर्ड उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल होगा। गृह मंत्रालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों के आधार पर यह व्यवस्था लागू करने की जानकारी दी है। अधिकारियों को सेवा अवधि के अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे।
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IPS Officers Training - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण को लेकर नई व्यवस्था की जानकारी दी है। इसके तहत अधिकारियों को नई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और आधुनिक कार्यप्रणाली से जुड़े निर्धारित पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का विवरण उनकी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। यह व्यवस्था कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों के आधार पर लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना और उनके पेशेवर कौशल को लगातार बेहतर बनाना है।

 कर्मयोगी मंच पर क्या करना होगा?

आईगॉट कर्मयोगी एक डिजिटल प्रशिक्षण मंच है, जिसे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए तैयार किया गया है। इस मंच पर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। अधिकारी अपनी जरूरत और सेवा से जुड़े विषयों के अनुसार प्रशिक्षण ले सकते हैं। पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ निर्धारित परीक्षा या मूल्यांकन की शर्तें भी पूरी करनी पड़ सकती हैं। प्रशिक्षण में नई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और सरकारी कामकाज के आधुनिक तरीकों जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में डिजिटल दक्षता और कार्यक्षमता को बढ़ावा देना है।

 अधिकारियों के लिए कितने पाठ्यक्रम चुने गए?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय ने आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए 24 पाठ्यक्रम चुने हैं। इन्हें अधिकारियों की सेवा अवधि के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी में छह पाठ्यक्रम रखे जाने की जानकारी दी गई है, जिनमें से पहले तीन अनिवार्य बताए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का रिकॉर्ड वित्त वर्ष 2026-27 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट से जोड़ा जाएगा। हालांकि, उपलब्ध कॉपी में सभी चार श्रेणियों और उनके पाठ्यक्रमों का पूरा विवरण नहीं है। इसलिए शेष श्रेणियों के पाठ्यक्रमों की पुष्टि आधिकारिक निर्देशों से करना जरूरी है।

 वर्ष 2018 या उसके बाद के अधिकारियों को क्या पढ़ना होगा?

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2018 और उसके बाद के बैच के आईपीएस अधिकारियों के लिए तीन अनिवार्य पाठ्यक्रम बताए गए हैं। इनमें उभरती तकनीकों की जानकारी, स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत जांच प्रक्रिया तथा साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी शामिल है। इसके अलावा व्यक्तिगत वित्त, नेतृत्व के क्षेत्र में प्रतिक्रिया और अपराध स्थल पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल जैसे विषयों का भी उल्लेख है। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य अधिकारियों को तकनीकी बदलावों, जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज के लिए तैयार करना है।

 वार्षिक मूल्यांकन पर इसका क्या असर होगा?

नई व्यवस्था में प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को पूरा करना अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि अधिकारियों को केवल प्रशिक्षण में भाग लेने के बजाय निर्धारित पाठ्यक्रमों को समय पर पूरा करने पर भी ध्यान देना होगा। उपलब्ध जानकारी में वर्ष 2011 से 2017 बैच के अधिकारियों के लिए दूसरी श्रेणी का उल्लेख है, जिसकी सेवा अवधि सात वर्ष से अधिक और 16 वर्ष तक बताई गई है। हालांकि, इस श्रेणी और बाकी दो श्रेणियों के पाठ्यक्रमों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। अधिकारी सटीक नियमों, समयसीमा और पाठ्यक्रमों की सूची के लिए गृह मंत्रालय तथा कर्मयोगी मंच के आधिकारिक निर्देश देखें।
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